रुद्रप्रयाग। छत्तीसगढ़ निवासी सुनील दीवान ने जिला अस्पताल में आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे टनल के अंदर सरिया से शटरिंग का काम कर रहे थे। उस वक्त उनके साथ करीब 17 लोग मौजूद थे। अचानक लगभग 150 मीटर की दूरी पर एक तेज धमाके के साथ भारी भूस्खलन हुआ, जिससे मलबा, पानी और भारी पत्थर बड़ी तेजी से टनल के भीतर आ घुसे। इस भीषण धक्के से कई मजदूर दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे के नीचे दब गए। गनीमत रही कि सुनील और उनके कुछ साथी मलबे के दबाव के कारण टनल के बाहर की ओर आ गिरे।
ऑक्सीजन की कमी से घुटने लगीं सांसें
हादसे के तुरंत बाद टनल के अंदर चीख-पुकार मच गई और मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे। टनल में जगह-जगह से मलबा भर जाने की वजह से ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो गया था, जिससे लोगों का दम घुटने लगा और वे चलने में असमर्थ होने लगे। समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू हो जाने से कई जिंदगियां बच गईं। बताया जा रहा है कि घटना के समय मुख्य कार्यस्थल पर 16-17 लोगों के अलावा बिजली ऑपरेटर और प्लंबर भी मौजूद थे। एक अन्य घायल ने बताया कि वह कीचड़ में आधे शरीर तक धंस गया था और उसने जैसे-तैसे अपनी जान बचाई।
पहले से ही मिट्टी धंसने की थी आशंका
टीएचडीसी की टीआर टनल से सुरक्षित बाहर निकले मजदूर इस खौफनाक मंजर के बाद से गहरे सदमे में हैं। कांपती आवाज में मजदूरों ने बताया कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां बुधवार को ही थोड़ी मिट्टी खिसकी थी और धंसने का खतरा पहले से बना हुआ था। गौरतलब है कि दुर्गापुर से सियासैंण तक करीब तीन किलोमीटर लंबी इस टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें यह दर्दनाक हादसा मुहाने से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर हुआ।
बिजली गुल होते ही छाया अंधेरा
ओडिशा निवासी जगेश्वर, जो टनल के अंदर भरे पानी को पंप के जरिए बाहर निकालने का काम करते हैं, उन्होंने बताया कि शाम करीब 6 बजे अचानक एक बहुत ही भयावह और तेज आवाज सुनाई दी। धमाके के तुरंत बाद टनल की पूरी बिजली गुल हो गई और हर तरफ अंधेरा छा गया। हादसे के वक्त जगेश्वर घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर थे, जिसकी वजह से वे सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे।





