इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अंतर्गत आने वाले महू क्षेत्र के मशहूर लोकगायक और पद्मश्री से सम्मानित भैरूसिंह चौहान को देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से नवाजा गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मालवा की पारंपरिक लोकधुनों और संत कबीर की अमर वाणी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित एक बेहद गरिमामय अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें वर्ष 2024-25 के 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया।
प्रशस्ति-पत्र और सम्मान किया गया प्रदान
भैरूसिंह चौहान को यह राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद से पूरे मालवा अंचल और उनके पैतृक क्षेत्र में हर्षोल्लास और गौरव का माहौल है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय तथा संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र, ताम्रपत्र और अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
निर्गुण गायन के लिए देशभर में हैं प्रसिद्ध
भैरूसिंह चौहान मालवा क्षेत्र में अपने अनूठे निर्गुण गायन के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। इंदौर जिले की महू तहसील के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव बजरंगपुरा के रहने वाले चौहान को संगीत की यह समृद्ध विरासत अपने परिवार से विरासत में मिली है। उनके पिता, स्वर्गीय मादू चौहान भी पारंपरिक कबीर गायन किया करते थे। भैरूसिंह ने अपने भजनों में मुख्य रूप से संत कबीर की वाणी के साथ-साथ गोरखनाथ, ब्रह्मानंद, मीराबाई और संत दादू दयाल जैसे महान संतों के पदों और भजनों को अपनी आवाज दी है।
6000 से अधिक मंचों पर दी प्रस्तुतियां
निर्गुण भक्ति के प्रख्यात गायक भैरू सिंह चौहान पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से मौखिक लोक परंपरा को जीवित रखने और उसे आगे बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन के पांच दशक पूरी तरह से भजन संगीत को समर्पित कर दिए हैं। मात्र 9 वर्ष की कोमल आयु से ही उन्होंने पारंपरिक मालवी लोक शैली में भजन गाना शुरू कर दिया था। अपने लंबे कलात्मक सफर में भैरू सिंह चौहान ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6000 से भी अधिक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं और इसके जरिए मालवा की समृद्ध संस्कृति को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित किया है।





