अमेरिका ने हांगकांग को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसे लेकर चीन नाराज हो गया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में हांगकांग और तिब्बत को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. इससे गुस्साए चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अमेरिका ने इस रिपोर्ट में हांगकांग की स्वायत्तता खत्म करने पर चीन की आलोचना की है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तिब्बत में अमेरिकी राजनयिकों की पहुंच सीमित करने को लेकर चीनी अधिकारियों पर निशाना साधा है. इन आरोपों के साथ ही उन्होंने नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है.

अमेरिकी विदेश विभाग की हांगकांग नीति अधिनियम रिपोर्ट 2025 में कहा गया है कि चीन ने हांगकांग की स्वायत्तता को पूरी तरह कुचल दिया है. रिपोर्ट में हांगकांग में मार्च 2024 में लागू ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अध्यादेश’ (SNSO) और 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSL) को लेकर गहरी चिंता जताई गई है. इसमें बताया गया है कि इन कानूनों के जरिए हांगकांग प्रशासन ने लोकतंत्र समर्थकों, पत्रकारों और सामान्य नागरिकों के अधिकारों का हनन किया है. खास बात यह है कि रिपोर्ट पहली बार विदेशी जजों के इस्तीफे और जेलों में रिमांड पर रखे गए कैदियों की संख्या को हांगकांग में कानून के शासन के खात्मे का सबूत बताती है.

अमेरिका का चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध
इसके अलावा, रिपोर्ट में हांगकांग पुलिस की ओर से विदेशों में रहने वाले छह लोकतंत्र समर्थकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और 127,000 डॉलर से ज्यादा के इनाम का जिक्र है. साथ ही, सात अन्य कार्यकर्ताओं के पासपोर्ट रद्द करने की कार्रवाई को ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ का उदाहरण बताया गया है, जिनमें से कुछ अमेरिका में रहते हैं. तिब्बत में अमेरिकी राजनयिकों की पहुंच रोकने से अमेरिका नाराज हो गया है. अमेरिका ने चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने चीन पर नाराजगी जाहिर की और उन्होंने दो ट्वीट्स के जरिए अपनी बात रखी. पहले ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘आज मैं उन चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगा रहा हूं, जो तिब्बत क्षेत्रों में पहुंच को सीमित करने के लिए जिम्मेदार हैं. चीन को हमारे राजनयिकों और अन्य लोगों को तिब्बत में वैसी ही पहुंच देनी चाहिए, जैसी उनके राजनयिकों को अमेरिका में मिलती है.’ दूसरे ट्वीट में उन्होंने हांगकांग पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा, ‘नवीनतम हांगकांग नीति अधिनियम रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन ने हांगकांग के लोगों से किए वादे तोड़े हैं. हम छह व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो हांगकांग की स्वायत्तता को कमजोर करने, लोगों की आजादी छीनने और अमेरिकी धरती पर कार्यकर्ताओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दमन में शामिल हैं.’ यह स्पष्ट है कि अमेरिका ने चीन पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है.

चीन का तीखा जवाब
चीन ने इस रिपोर्ट और प्रतिबंधों पर कड़ा ऐतराज जताया.अमेरिका में चीनी दूतावास ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, ‘हम अमेरिका की नई हांगकांग रिपोर्ट और छह चीनी अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और इसका विरोध करते हैं. यह रिपोर्ट हांगकांग के लोकतंत्र, कानून के शासन, मानवाधिकार और स्वतंत्रता को बदनाम करने वाली पुरानी बातों को दोहराती है. यह चीन के आंतरिक मामलों और हांगकांग के मामलों में घोर दखलंदाजी है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों के बुनियादी नियमों का उल्लंघन करती है.’

दूतावास ने आगे कहा, ‘हम अमेरिका से तथ्यों का सम्मान करने, हांगकांग के मामलों और चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करने का आग्रह करते हैं. हम अमेरिका से हांगकांग के लोकतंत्र व कानून के शासन को बदनाम करने वाले बयानों को बंद करने का आग्रह करते हैं. चीन अमेरिका के गलत कदमों का जवाब देने के लिए कड़े कदम उठाएगा.’

हांगकांग पर क्यों बोलता है अमेरिका?
हांगकांग चीन का हिस्सा है, इसके बावजूद अमेरिका को समस्या क्यों है? हांगकांग चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है, जिसे 1997 में ब्रिटेन ने ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत चीन को सौंपा था. इसके तहत हांगकांग को 2047 तक अपनी कानूनी व्यवस्था, स्वायत्तता और आजादी रखने का अधिकार था, जिसमें विदेशी जजों की भूमिका भी शामिल थी. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि बीजिंग ने इन वादों को तोड़ा और हांगकांग को धीरे-धीरे अपने कब्जे में ले लिया है.