
ईरान को लेकर तनाव बढ़ता ही जा रहा है. पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान जल्द ही परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते पर नहीं आता तो उसे बमबारी और सख्त आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. अब इस मामले में एक और बड़ा बयान आया है. बयान आया है फ्रांस की तरफ से.
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नया समझौता नहीं हुआ तो हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि सैन्य टकराव लगभग तय माना जा सकता है. उनका कहना है कि कूटनीति के लिए समय बहुत कम बचा है और अगर जल्द ही कोई हल नहीं निकला तो टकराव निश्चित ही है.
क्यों बढ़ रहा है तनाव?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ती जा रही है. 2015 में हुए जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) समझौते के तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी गई थी, बशर्ते वह अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित रखे. मगर 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से खुद को अलग कर लिया और ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए. इस फैसले के खिलाफ उस वक्त भी रूस और चीन ईरान के साथ खड़े थे.
अमेरिका के इस समझौते से अलग होने के बाद से ही ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन की सीमा को पार कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ गई. फ्रांस समेत यूरोपीय देश अब इस मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि इस साल के मध्य तक कोई नया समझौता हो जाए, क्योंकि अक्टूबर 2025 में ईरान पर लगे संयुक्त राष्ट्र के कुछ अहम प्रतिबंध समाप्त होने वाले हैं.
रूस-चीन की रणनीति क्या?
ईरान के सबसे मजबूत साझेदार रूस और चीन इस मुद्दे पर पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को ही मास्को में मुलाकात की, जहां उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चर्चा की. यह जानकारी रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार देर रात दी.
वांग यी तीन दिवसीय दौरे पर मास्को पहुंचे हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की. बीते महीने ही दोनों देशों ने साफ कर दिया था कि अमेरिका की मांगों पर किसी भी नए परमाणु समझौते की बातचीत आपसी सम्मान के आधार पर ही होने चाहिए और ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए.
क्या ईरान सैन्य कार्रवाई से बच पाएगा?
ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. मगर पश्चिमी देशों को इस पर भरोसा नहीं है. अमेरिका और यूरोप के लिए ईरान की बढ़ती यूरेनियम क्षमता खतरे की घंटी है. अगर आने वाले महीनों में कोई नया समझौता नहीं हुआ तो पश्चिमी देश ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं. वहीं, रूस और चीन इस मामले में ईरान का समर्थन कर रहे हैं, जिससे यह विवाद और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है.