नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तीखी होती जा रही है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक, देश के विभिन्न राज्यों में छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और कई अन्य संवेदनशील मुद्दों को लेकर विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग पर अड़ा हुआ है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार सभी विषयों पर नियमनुसार चर्चा कराने को तत्पर है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भागते हुए सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का विपक्ष पर जोरदार प्रहार

संसदीय गतिरोध के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण और राजनीतिक शैली पर कड़ा प्रहार किया है। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की तुलना गांव के किसी उद्दंड बच्चे से करते हुए कहा कि उनके बात करने के तरीके, चेहरे के हाव-भाव और संसदीय व्यवहार में गंभीरता की कमी साफ झलकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के रूप में वह संसदीय मर्यादाओं का पालन करने के बजाय एक 'हिट-एंड-रन' शैली की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं।

संसदीय प्रणाली और नेतृत्व पर उठाए सवाल

गिरिराज सिंह ने कहा कि विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देने की बात करता है, जबकि अमित शाह ने अपने कार्यों से अपनी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक परिपक्वता को साबित किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'अर्बन नक्सल' जैसी भूमिका निभा रहे हैं और यदि उनमें वास्तव में हिम्मत है, तो उन्हें संसदीय नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए और दूसरों के विचारों को भी धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए।

अन्य राज्यों के मुद्दों और चर्चा से भागने का आरोप

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि विपक्ष में नीट मामले पर वास्तविक चर्चा का सामना करने का साहस नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, तो इसमें केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में प्रशासनिक विफलताओं पर भी बात होगी। इसी डर से विपक्ष सदन में सार्थक चर्चा से कतरा रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व पर टिप्पणी

कांग्रेस के अंदरूनी घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे अत्यंत अनुभवी और कई पीढ़ियों को देखने वाले वरिष्ठ नेताओं को भी पार्टी में राहुल गांधी की नीतियों का समर्थन करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस प्रकार की राजनीतिक कार्यशैली न केवल कांग्रेस पार्टी के भविष्य को गर्त में धकेलेगी, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और संसदीय प्रणाली की गरिमा को भी भारी नुकसान पहुँचाएगी।