नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI2379) में अचानक ऊंचाई घटने से हुए हादसे ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस घटना में 24 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के घायल होने के बाद हुई पूछताछ में विमान के कमांडर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। कमांडर ने स्वीकार किया कि वह काफी समय से अनिद्रा की समस्या से परेशान था और उड़ान के दौरान कॉकपिट में लगभग 30 से 35 मिनट तक सोया था। इसके अलावा, हादसे के बाद कराए गए अनिवार्य मेडिकल टेस्ट में कमांडर के शरीर में मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि हुई है, जिससे एयरलाइन की सुरक्षा नीतियों और पायलटों की फिटनेस जांच पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
कॉकपिट में हादसे के वक्त क्या हुआ?
जांच अधिकारियों के सामने कमांडर ने बताया कि Phuket में रुकने के दौरान भी उसे ठीक से नींद नहीं आई थी। उड़ान के दौरान कुछ देर सोने के बाद वह वॉशरूम गया और लौटकर फर्स्ट ऑफिसर की सीट के पीछे खड़ा होकर एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर बात करने लगा। उसी वक्त एयरबस A320 विमान की ऊंचाई में अचानक और तेज गिरावट आई, जिससे कमांडर कॉकपिट के फर्श पर गिर गया और उसे संभालने के लिए केबिन क्रू की मदद लेनी पड़ी। फिलहाल जांच एजेंसियां (AAIB) कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा के जरिए यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि उस वक्त विमान नियंत्रण प्रणाली में क्या बदलाव हुए थे।
ड्रग टेस्ट में मारिजुआना मिलने से हड़कंप
हादसे के बाद जब दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट कराया गया, तो कमांडर की शुरुआती रिपोर्ट 'नॉन-नेगेटिव' आई। इसके बाद हुई विस्तृत लैब जांच में मारिजुआना के अंश पाए गए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टेस्ट पॉजिटिव आने से यह साबित नहीं होता कि कमांडर दुर्घटना के समय नशे में था या ऊंचाई घटने का मुख्य कारण यही था। जांचकर्ता अब टेस्ट के समय, सैंपल की प्रकृति और कमांडर के मेडिकल बैकग्राउंड को आपस में जोड़कर मामले की तह तक पहुंचने में जुटे हैं।
नींद की दवा और सुरक्षा नियमों पर उठते सवाल
पूछताछ में कमांडर ने यह भी माना कि वह नींद ना आने की वजह से अपने फैमिली डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं ले रहा था, लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कौन सी दवाएं और कब से खा रहा था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सख्त नियमों के मुताबिक, किसी भी पायलट या क्रू मेंबर को ऐसी किसी भी दवा या साइकोएक्टिव पदार्थ का सेवन करने से बचना होता है जो उसकी उड़ान क्षमता को प्रभावित कर सके। अब एयर सेफ्टी एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि क्या कमांडर ने अपनी इस बीमारी और दवाओं की जानकारी एयरलाइन के मेडिकल विभाग को दी थी या नहीं।





