भोपाल: मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में मूसलाधार बारिश का दौर थमने के बाद अब मानसून का एक नया और सक्रिय सिस्टम राज्य के पूर्वी इलाकों में अपना असर दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मौसम विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, शुक्रवार से जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के तमाम जिलों में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, आज गुरुवार को शिवपुरी और श्योपुर जिलों में भी तेज बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया गया है। मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, इन दोनों जिलों में आगामी 24 घंटों के दौरान 4 इंच या उससे अधिक पानी बरस सकता है।

इन जिलों में भी लगातार बारिश के आसार

राजधानी भोपाल के अलावा रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी बारिश का यह दौर लगातार जारी रह सकता है। राज्य के इन विभिन्न हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बौछारें पड़ने की उम्मीद है।

लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ का दिख रहा असर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मध्य प्रदेश के ऊपर एक स्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बना हुआ है, जिसके साथ ही मानसून ट्रफ भी पूरी तरह सक्रिय स्थिति में है। इसके अतिरिक्त, राज्य के दक्षिणी हिस्से से एक अन्य ट्रफ रेखा भी गुजर रही है, जिसके प्रभाव से पिछले 48 घंटों से प्रदेश के अलग-अलग कोनों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में एक और नया लो प्रेशर एरिया विकसित हो सकता है, जिसका मुख्य प्रभाव विशेष तौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों पर देखने को मिलेगा।

राज्य के 43 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश

भले ही मानसून एक बार फिर सक्रिय हो रहा है, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से राज्य के 43 जिलों में अभी भी औसत से कम बारिश दर्ज की गई है:

  • पूर्वी हिस्से का हाल: जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के जिलों में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से लगभग 19 प्रतिशत तक पीछे चल रहा है।

  • विशिष्ट आंकड़े: बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में औसत से 5 से 52 प्रतिशत तक कम पानी बरसा है।

पश्चिमी हिस्से में भी बना हुआ है बारिश का घाटा

केवल पूर्वी मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में भी मानसूनी घाटा बना हुआ है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा ऐसे इलाके हैं जहां सीजन की औसत बारिश से 4 से 46 प्रतिशत तक कम पानी रिकॉर्ड किया गया है।

केवल 12 जिलों में दर्ज की गई सामान्य से अधिक बारिश

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में केवल कुछ चुनिंदा जिले ही ऐसे हैं जहां स्थिति बेहतर है। भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन वे 12 जिले हैं जहां अब तक सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। नए मानसूनी सिस्टम के सक्रिय होने से शेष जिलों में भी इस कमी के पूरा होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।