लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सातवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को जीवन और रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण सीख दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक समय में संबंध बनाने या साथी चुनने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन यदि किसी से विवाह का वादा किया गया है, तो उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना भी आवश्यक है। राज्यपाल ने कम उम्र में लड़कियों के माता-पिता बनने और फिर उन्हें अकेला छोड़ दिए जाने जैसी घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने युवाओं को पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी ताकि वे भविष्य में अपने परिवार की सभी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभाल सकें।
दीक्षांत समारोह में बांटी गईं डिग्रियां
इस भव्य आयोजन के दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 2,279 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक सफलता के लिए डिग्रियां और डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें 20 शोधार्थियों को पीएचडी, 324 विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएशन और 1,612 विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन की उपाधियां दी गईं। इसके अतिरिक्त, 323 विद्यार्थियों को डिप्लोमा से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष मिनी एक्सपो का भी आयोजन किया गया, जिसमें रोबोटिक्स, आधुनिक तकनीक, योग, वैदिक विज्ञान और एनिमेशन से जुड़े आकर्षक प्रोजेक्ट्स को प्रदर्शित किया गया।
शिक्षा से वंचित न रहे कोई बच्चा
राज्यपाल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक तंगी के कारण प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे आगे आकर जरूरतमंद बच्चों की सहायता करें। उन्होंने यह भी साझा किया कि राज्य के विश्वविद्यालयों को पांच-पांच गोद लिए गए गांवों से जोड़ा गया है, जहां जाकर संस्थान के प्रतिनिधि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेंगे। इसके अलावा, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले 450 बच्चों को पढ़ाने की एक विशेष पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षकों के निरंतर प्रयासों से इन बच्चों के आचरण और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।
आंगनवाड़ी केंद्रों और शिक्षा के उद्देश्यों पर चर्चा
अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पौष्टिक आहार के रूप में चना और गुड़ उपलब्ध कराने की पहल की याद दिलाई। समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी हिस्सा लिया और शिक्षा का असली उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व और आचरण को संवारना बताया। उन्होंने सार्वजनिक मंचों और प्रदर्शनों के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया और समाज में बढ़ रही अमर्यादित प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की।





