हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने मनोरंजन उद्योग में आए बड़े बदलावों और सितारों पर बढ़ते दबाव को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। उनका मानना है कि वर्तमान दौर में पैपराजी कल्चर के विस्तार और सोशल मीडिया के अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण अभिनेताओं को लगातार कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, आज के दौर में कलाकारों पर अतीत की तुलना में कहीं अधिक मानसिक और सामाजिक दबाव है।

'एयरपोर्ट लुक' से लेकर हर स्थिति में फैशनेबल दिखने की मजबूरी पर जताया आश्चर्य

वर्ष 2016 में विवाह के उपरांत अमेरिका में बस चुकीं प्रीति जिंटा इन दिनों अपनी आगामी स्पाई-कॉमेडी फिल्म 'वाइब' के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में मुंबई पहुंची हुई हैं। लंबे अंतराल के बाद वापसी पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ा कल्चरल शॉक एक्टिंग नहीं, बल्कि फिल्मों के इर्द-गिर्द का माहौल है। अब केवल अभिनय तक काम सीमित नहीं है, बल्कि 'एयरपोर्ट लुक' से लेकर हर सुख-दुख में फैशनेबल और प्रस्तुत करने योग्य दिखना एक अनिवार्यता बन चुका है।

सामाजिक-राष्ट्रीय मुद्दों पर राय व्यक्त करने की बाध्यता

अभिनेत्री ने कहा कि आज के अभिनेताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें देश-दुनिया की हर घटना की सटीक जानकारी हो और वे उन पर अपनी राय भी प्रकट करें। सेट पर अभिनय करने के साथ-साथ सेट के बाहर अपनी छवि को बनाए रखना, सही बयान देना और हमेशा आकर्षक दिखना कलाकारों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती और दबाव बन गया है।

18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी फिल्म 'वाइब'

हाल ही में सनी देओल के साथ फिल्म 'बंटवारा 1947' में नजर आ चुकीं प्रीति जिंटा जल्द ही अपनी नई फिल्म 'वाइब' में दिखाई देंगी। इस फिल्म में वे 'मैडम एच' नाम की एक जासूस की भूमिका निभा रही हैं, जो एक विशेष मिशन के लिए दो अनुभवहीन दोस्तों को प्रशिक्षित करती हैं। कुणाल खेमू के अभिनय से सजी यह फिल्म 18 सितंबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।