सुवा। भारत से हजारों किलोमीटर दूर स्थित प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश फिजी में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं आज भी उसी गहराई के साथ जीवित हैं, जैसी 19वीं शताब्दी में गिरमिटिया श्रमिकों के आगमन के समय थीं। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर यहाँ के देवालय और सांस्कृतिक केंद्र भक्ति संगीत तथा भजनों से गूंजते रहे। इसी क्रम में आयोजित 'भजन जैमिंग 2026' कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं ने अभूतपूर्व उत्साह के साथ भाग लिया।

भजन जैमिंग कार्यक्रम और युवाओं की भागीदारी

क्षेत्र के प्रसिद्ध श्री राम मंदिर में आगामी रामलीला मंचन की तैयारियां अभी से आरंभ कर दी गई हैं तथा घरों में नियमित रामायण की चौपाइयों का पाठ किया जा रहा है। प्रवासी भारतीय अपनी इस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व महसूस करते हैं, वहीं विदेशी नागरिक भी इन परंपराओं से प्रेरित हो रहे हैं। इस सांस्कृतिक आयोजन में फिजी के भारतीय मूल के नवयुवकों ने पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत शैलियों का समावेश करते हुए बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।

स्थानीय मंडलियों और छात्र संगठनों की प्रस्तुतियां

इस भव्य संगीत कार्यक्रम में बंदिश ग्रुप, सुकून ग्रुप और हनुमान चालीसा परिवार जैसे स्थानीय समूहों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ पैसिफिक के भारतीय छात्र संघ के कलाकारों ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। फिजी में भारतीय सिनेमा अर्थात बॉलीवुड न केवल फिल्मों की शूटिंग और रेडियो कार्यक्रमों तक सीमित है, बल्कि यह स्थानीय इंडो-फिजी समुदाय की सांस्कृतिक अस्मिता का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।