बेगूसराय। बहुचर्चित होमगार्ड जवान मंटून राय हत्याकांड में करीब नौ साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 मनोज कुमार की अदालत ने शनिवार, 22 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए तीन दोषियों चंदन सिंह, नंदन सिंह और विमल राय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 35-35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला रतनपुर थाना क्षेत्र के पिपरा-इटवा तीनमुहान रोड से जुड़ा है। 4 अप्रैल 2017 को होमगार्ड जवान मंटून राय की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने कुल 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। जांच के बाद चंदन सिंह, नंदन सिंह, विमल राय और सावित्री देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान सावित्री देवी की मृत्यु हो गई। अदालत ने धारा 302/149 भादवि के तहत चंदन सिंह, नंदन सिंह और विमल राय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, धारा 120बी भादवि के तहत तीनों को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। इसके अलावा धारा 27 आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
- 2018 में गठित हुए थे आरोप
मामले की सुनवाई सत्र वाद संख्या 9/18 के तहत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 की अदालत में हुई। 27 नवंबर 2018 को आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 149, 120बी भादवि और 27 आर्म्स एक्ट के तहत आरोप गठित किए गए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई। मृतक के भाई और सूचक प्रमोद राय के अलावा राजीव राय, शंभू राय, अशोक राय, अनिल राय और सुधीर राय ने अदालत में गवाही दी। इसके साथ ही मामले के अनुसंधानकर्ता अमित कुमार और चिकित्सक डॉ. कुमार सिंह की भी गवाही दर्ज की गई।
- परिजनों ने जारी रखी कानूनी लड़ाई
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतक के परिजनों को गवाही से रोकने के लिए कथित तौर पर धमकी और दबाव दिए जाने की बात भी सामने आई। इसके बावजूद परिवार ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। मृतक के भाइयों और पुत्र ने अदालत में उपस्थित होकर अपनी गवाही दर्ज कराई। परिजनों की गवाही को अभियोजन के मामले में महत्वपूर्ण कड़ी माना गया। लंबी सुनवाई के बाद 12 अगस्त 2026 को अदालत ने चंदन सिंह, नंदन सिंह और विमल राय को दोषी करार दिया था। इसके बाद शनिवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- करीब नौ साल बाद आया फैसला
मामले में अभियोजन की ओर से अधिवक्ता गोपाल कुमार साहू ने पैरवी की, जबकि सूचक की ओर से वरीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान गवाहों की गवाही और मामले से जुड़े साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मंटून राय हत्याकांड में अदालत का फैसला मृतक के परिवार के लिए करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद आया है। वर्ष 2017 में हुई हत्या के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली। शुरुआत में 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस जांच के बाद चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया, जिनमें से सावित्री देवी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। अब अदालत ने शेष तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।





