कोलकाता| तृणमूल कांग्रेस (TMC) का साथ छोड़कर एनडीए गठबंधन में शामिल होने वाले बागी सांसदों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने एक बार फिर बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। शनिवार (1 अगस्त) को उन्होंने एक बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने वाले टीएमसी के बागी नेता अब वहाँ खुद को बेहद असहज महसूस कर रहे हैं, और साथ ही उन पर सत्ता पक्ष के साथ ही बने रहने का भारी मानसिक दबाव भी डाला जा रहा है।
टीएमसी के इन पूर्व नेताओं के दोबारा पार्टी में वापसी करने की चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सौगत रॉय ने कहा कि उनमें से कुछ नेता सीधे तौर पर उनके संपर्क में हैं। टीएमसी सांसद ने स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैंने खुद उनमें से कुछ बागी नेताओं से बातचीत की है। वे भाजपा के साथ खुद को काफी असहज पा रहे हैं। संभवतः उन पर पार्टी में ही बने रहने के लिए भारी दबाव और धमकियां डाली जा रही हैं। यदि वे वापस लौटकर अपनी पुरानी पार्टी में आते हैं, तो यह एक बहुत अच्छी बात होगी। मैंने इस पूरे विषय पर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी चर्चा की है।'
क्या बोले टीएमसी सांसद सौगत रॉय?
सौगत रॉय ने आगे दावा किया कि उन्हें यह पुख्ता जानकारी मिली है कि एनसीपीआई (NCPI) से जुड़े नेता अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान वास्तव में एनडीए का हिस्सा बनना नहीं चाहते थे और न ही वे भाजपा के साथ किसी प्रकार का राजनीतिक गठबंधन चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने इसका सांकेतिक बहिष्कार किया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी बातचीत का दौर जारी है और फिलहाल किसी भी अंतिम फैसले को रूप नहीं दिया गया है। जब इन नेताओं ने टीएमसी छोड़ी थी, तब यह बिल्कुल तय नहीं था कि वे सीधे भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वर्तमान स्थिति यह है कि इन नेताओं के लिए अपने समाज और समुदाय के प्रति जवाबदेह होना बेहद मुश्किल साबित होता जा रहा है।
एनडीए की बैठक से नदारद रहे थे एनसीपीआई के तीनों सांसद
सौगत रॉय का यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब बीते मंगलवार (28 जुलाई) को हुई एनसीपीआई की उच्चस्तरीय बैठक में पार्टी के ये तीनों प्रमुख नेता शामिल नहीं हुए थे। इस घटना के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर अंदरूनी मतभेदों और कलह की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, पार्टी ने उस समय इन अटकलों को खारिज करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन टीएमसी नेताओं के मुताबिक यह साफ है कि ये तीनों सांसद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ खुलकर खड़े होने के पक्ष में नहीं हैं।
गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी का दामन छोड़ दिया था और उन्होंने 'राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी' (एन.डी.) में शामिल होने का ऐलान किया था। उस दौरान पार्टी की ओर से यह घोषणा की गई थी कि वह केंद्र की सत्ताधारी एनडीए को अपना समर्थन देगी, लेकिन अब इन बागी नेताओं के भीतरखाने चल रही सुगबुगाहट से सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ गया है।





