अहमदाबाद: गुजरात में भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जमीन को फर्जी दस्तावेज बनाकर बेचने के मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को दो साल कैद की सजा सुनाई है। राज्य में हैरान कर देने वाला यह मामला खेड़ा जिले का है, हालांकि लंबे चले कानूनी मामले में एक आरोपी की मौत हो चुकी है। लौह पुरुष सरदार पटेल की जमीन हड़पने के इस मामले में कोर्ट के फैसले के बाद हर कोई चकित है।

क्या है पूरा मामला?
खेड़ा जिले की मेहमदाबाद (Mehmdabad) तहसील की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार मेहमदाबाद के गड़वा गांव में सर्वे नंबर 270 पर एक जमीन का टुकड़ा (करीब छह बीघा) गुजरात प्रांतीय संघ (जीपीएस) के साथ सरदार वल्लभभाई जावरभाई के नाम पर पंजीकृत था। जब सरकार ने 2004 में राजस्व अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण किया, तो जमीन की विशेषताओं को गलती से बदल दिया गया। जबकि मालिक का नाम वल्लभभाई जावरभाई लिखा गया था, जीपीएस का संदर्भ हटा दिया गया था। इस गलती का फायदा उठाते हुए खेड़ा के कठलाल तालुका के अरल गांव के भूपेंद्र डाभी ने जमीन के दस्तावेज में हीराभाई का नाम वल्लभभाई जावरभाई लिखा और जमीन को अपने नाम पर बदल दिया।

2010 में हुआ दाखिल खारिज
डाभी ने अपने पिता देसाईभाई और प्रतान चौहान को गवाह के तौर पर इस्तेमाल किया। 2010 में जमीन का दाखिल खारिज हुआ था और बाद में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सरकारी वकील केए सुथार ने पूरा मामला बताया और कोर्ट के सामने सबूत पेश किए। कोर्ट ने तीन आरोपियों को दो साल की सजा सुनाई। मुकदमे के दौरान हीरालाल की मौत हो गई। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास विशाल त्रिवेदी के फैसले के अनुसार जीवित दोनों दोषियों को जेल की सजा काटनी होगी। उन्होंने इस पूरे मामले में तीनों आरोपियों को दोषी माना है।