वीकेंड के मौके पर विश्व प्रसिद्ध बाबा के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. शनिवार को मंगला आरती के समय से ही लाखों भक्तों के आने का सिलसिला जारी है. इसके अलावा आज रविवार को भी अलसुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार में पहुंच रहे रहे. श्रद्धालुओं को 14 कतारों से दर्शन करवाए जा रहे हैं. गर्मी को देखते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई.
इस बार वीकेंड पर बाबा श्याम के मंदिर मंडप प्रांगण को भी भव्य रूप से सजाया गया. इसके अलावा अलग अलग राज्यों से मंगवाए गए फूलों से बाबा श्याम का भी लाल फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया गया. मंदिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीएसपी राजेश कुमार जांगिड़ एवं थानाधिकारी के नेतृत्व में करीब 350 पुलिसकर्मी, आरएसी जवान और होमगार्ड्स का जाब्ता तैनात किए गए हैं. मंदिर परिसर में श्री श्याम मंदिर कमेटी के सुरक्षा गार्ड्स भी तैनात हैं. श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं.
VIP दर्शन पूरी तरह बंद
दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कतार प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए. वहीं, VIP दर्शन भी पूरी तरह बंद है. केवल प्रोटोकॉल के तहत ही VIP दर्शन के लिए एंट्री दी जा रही है. आपको बता दें कि आज रविवार को छुट्टी के समय होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. इस दिन बाबा शाम का विशेष मनमोहक श्रृंगार भी किया जाता है. बाबा के दर्शन करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा सहित देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
तिलक श्रृंगार के चलते 17 को शाम तक बाबा श्याम के पट रहेंगे बंद
अमावस्या के अवसर पर बाबा श्याम का पवित्र स्नान करवाने के बाद तिलक श्रृंगार किया जाएगा. तिलक श्रृंगार के चलते 16 सितंबर की रात 10 बजे से मंदिर के पट बंद हो जाएंगे जो 17 सितंबर को शाम पांच बजे खुलेंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने श्रद्धालुओं से 17 सितंबर को पट खुलने के बाद ही खाटूधाम पहुंचने की अपील की है ताकि दर्शन करने में परेशानी ना हो.
जानिए कौन हैं बाबा श्याम
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभीसे बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.





