यरूशलम। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़ी कार्रवाई करते हुए हिजबुल्लाह की दो किलोमीटर से अधिक लंबी भूमिगत सुरंग को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इस विशाल सुरंग को नेस्तनाबूद करने के लिए लगभग 1100 टन शक्तिशाली विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया। इस भीषण धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के पूरे क्षेत्र में 4.1 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए और जमीन थर्रा उठी। इस बड़ी सैन्य सफलता के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी करते हुए 'मिशन पूरा होने' की बात कही।
सुरंग में छिपा था भारी जखीरा
इजरायली सैन्य खुलासे के मुताबिक, तबाह की गई इस सुरंग के भीतर ईरान में निर्मित दर्जनों रॉकेट, मिसाइल और अत्याधुनिक ड्रोन छिपाकर रखे गए थे। इसके अलावा इस परिसर से भारी मात्रा में मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइलें और सैकड़ों बारूदी सुरंगें भी बरामद की गई हैं। सेना द्वारा जारी किए गए फुटेज में अली अल-ताहेर पहाड़ी के नीचे बने इस विशाल टनल नेटवर्क के भीतर सैनिकों को तलाशी अभियान चलाते हुए देखा जा सकता है। इसी भूमिगत ठिकाने से हिजबुल्लाह की कुख्यात 'बद्र' यूनिट अपना कमांड सेंटर संचालित कर रही थी।
कार्रवाई में मारे गए कई विद्रोही लड़ाके
सैन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सामरिक साइट पर कब्जे के दौरान सुरंग से भागने की कोशिश कर रहे कई हिजबुल्लाह लड़ाके मारे गए। तलाशी के दौरान सैनिकों को मौके से लगभग 12 शव भी बरामद हुए हैं, हालांकि कुछ लड़ाके वहां से फरार होने में भी कामयाब रहे। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जानकारी दी कि इस जटिल टनल नेटवर्क को तैयार करने में करीब 20 साल का समय लगा था, जिसे पूरी तरह से ईरान से मिलने वाली फंडिंग के जरिए बनाया गया था। इजराइल के रक्षामंत्री इजराइल काट्ज ने इस ठिकाने को एक खतरनाक आतंकी ढांचा करार दिया है।
इलाके के चप्पे-चप्पे पर इजराइल का नियंत्रण
इजरायली सेना का दावा है कि अब दक्षिणी लेबनान के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में जमीन के ऊपर और नीचे दोनों ही स्तरों पर उनका पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है। हिजबुल्लाह की 'बद्र' यूनिट दक्षिणी लेबनान में संगठन की सबसे रीढ़ मानी जाने वाली सैन्य इकाइयों में शामिल है, जो मुख्य रूप से लिटानी नदी के उत्तर के इलाकों में सक्रिय रहती है। हालिया सैन्य अभियानों और सटीक हवाई हमलों के बाद इस क्षेत्र में हिजबुल्लाह की कमर टूटती नजर आ रही है।





