भोपाल: मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के समीप मंगलवार दोपहर उस वक्त भारी तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा एक खंभे से भगवा झंडा उतार दिया गया। झंडे को कथित तौर पर नीचे पड़ा देख हिंदू धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व कार्यकर्ता मौके पर एकत्र हो गए और प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते घटना स्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप, दोबारा झंडा लगाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने जिला प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई कलेक्टर हरेंद्र नारायण के निर्देशों और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के आदेश पर की गई है। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक हटाया गया भगवा ध्वज पूरे सम्मान के साथ उसी स्थान पर वापस नहीं फहराया जाता, तब तक उनका धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

तिरंगा लगाने की योजना के तहत हटाया गया था ध्वज, नीचे पड़ा देख भड़का गुस्सा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस विद्युत खंभे पर भगवा झंडा लगा हुआ था, वहां स्वाधीनता प्रतीक तिरंगा फहराने की प्रशासनिक योजना थी। इसी सिलसिले में निगम के अमले ने भगवा ध्वज को हटाया था। हालांकि, प्रक्रिया के दौरान झंडे को उपेक्षित अवस्था में नीचे पड़ा देख हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने इसे धार्मिक प्रतीकों का अनादर करार देते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

निगम आयुक्त ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा, स्वयं फहराया भगवा ध्वज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त सीपी राय तुरंत मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। स्थिति को नियंत्रित करने और जनभावनाओं का आदर करते हुए उन्होंने स्वयं खंभे पर चढ़कर भगवा झंडे को ससम्मान पुन: स्थापित कराया। आयुक्त द्वारा झंडा लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत हुआ और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकी।

कमिश्नर की सफाई, प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी

निगम कमिश्नर सीपी राय ने जानकारी दी कि दोपहर में कर्मचारियों द्वारा झंडा हटाने के बाद उपजे विवाद की सूचना पर वे तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे थे और नागरिकों से संवाद कर समस्या का समाधान करा दिया है। वर्तमान में क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम है। वहीं, झंडा हटाने के पीछे की वजहों और लगे आरोपों पर जिला प्रशासन की ओर से कोई पृथक औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।