मॉस्को| नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आगामी 11 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता आयोजित होगी। क्रेमलिन ने इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि करते हुए भारत को रूस का बेहद अहम "विशेष रणनीतिक साझेदार" करार दिया है। वार्ता से पूर्व मॉस्को में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बहुत ही सहज, पारदर्शी और रचनात्मक संबंध हैं।

'ब्रिक्स कोई संगठन नहीं, बल्कि समान विचारधारा वाले देशों का क्लब है'

ब्रिक्स की संरचना पर प्रकाश डालते हुए क्रेमलिन प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह कोई औपचारिक संगठन या चार्टर आधारित निकाय नहीं है, बल्कि यह समान दृष्टिकोण रखने वाले राष्ट्रों का एक प्रभावशाली समूह है। उन्होंने बताया कि इस समूह में नए 'पार्टनर कंट्री' प्रारूप के तहत बेलारूस, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड और उज्बेकिस्तान जैसे देशों को जोड़ा गया है, जो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक पर कड़ा रुख और राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार

भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध संबंधी प्रस्तावों को रूस ने पूरी तरह अवैध और अस्वीकार्य करार दिया। पेस्कोव ने रेखांकित किया कि रूस और ब्रिक्स साझेदार देशों के बीच अब लगभग 90 प्रतिशत व्यापारिक भुगतान उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया और रूबल) में हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यापक रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं।

नए परमाणु संयंत्र और अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमानों पर वार्ता संभव

आगामी द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना तथा रूस के अत्याधुनिक Su-57 स्टेल्थ लड़ाकू विमानों की संभावित आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत होने की संभावना है। क्रेमलिन ने संकेत दिए हैं कि रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नए आयाम देने के लिए इस वार्ता में विशेष प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा और भारत के शांति प्रयासों की सराहना

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में पेस्कोव ने कहा कि नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक के दौरान शांति स्थापित करने की दिशा में जारी प्रयासों पर भी चर्चा होगी। रूस ने संकट के समाधान के लिए भारत द्वारा कूटनीतिक और शांतिपूर्ण बातचीत के मार्ग का समर्थन करने वाले कदमों की सराहना की है।