वॉशिंगटन (अमेरिका): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में संपन्न हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Makkah Joint Defense Agreement) का खुले तौर पर स्वागत किया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते को एक "शानदार और साहसिक कदम" करार देते हुए कहा है कि इससे मध्य पूर्व क्षेत्र में आपसी एकता को बढ़ावा मिलेगा और इन तीनों देशों को अपनी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। ट्रंप के अनुसार, यह समझौता व्यापक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आपसी सहयोग के नए द्वार खोलेगा।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

गत 7 अगस्त को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस रणनीतिक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए थे। इस रक्षा समझौते के तहत तीनों प्रमुख देशों ने भविष्य में किसी भी बाहरी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ अपनी 'सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता' (Collective Deterrence) को मजबूत करने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

समझौते के सबसे अहम प्रावधान के मुताबिक, इन तीनों देशों में से यदि किसी भी एक राष्ट्र पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ संयुक्त हमला माना जाएगा। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान के अनुसार, आपसी रक्षा से जुड़ा यह प्रावधान तकनीकी रूप से अमेरिकी सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) संधि के चर्चित 'अनुच्छेद-5' (Article 5) के बिल्कुल समान है। हालांकि, तुर्की ने यह स्पष्ट किया है कि इस समझौते में किसी भी विशिष्ट देश को 'साझा शत्रु' के रूप में चिन्हित नहीं किया गया है, और विशेष तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि यह समझौता किसी भी प्रकार से ईरान के खिलाफ नहीं है।

फिदान ने यह भी जानकारी दी कि यदि किसी सदस्य देश पर कोई बाहरी संकट या खतरा उत्पन्न होता है, तो उसे औपचारिक रूप से अन्य सहयोगी देशों से सहायता का अनुरोध करना होगा। इसके पश्चात, खतरे की गंभीरता और प्रकृति के आधार पर अन्य दोनों देश खुफिया जानकारियां साझा करने, साजो-सामान या रसद सहायता प्रदान करने, अथवा आवश्यकता पड़ने पर अपनी सैन्य इकाइयों की तैनाती जैसे सख्त कदम उठा सकते हैं।

भारत की सतर्क प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय समीकरण

इस त्रिपक्षीय सैन्य समझौते पर भारत ने बेहद सतर्क और नपा-तुला रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से कहा गया है कि नई दिल्ली इस बात का बारीकी से आकलन कर रही है कि इस नए रक्षा गठजोड़ का क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या और किस प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीति के जानकारों का मानना है कि तेल संपदा से पूरी तरह समृद्ध सऊदी अरब, दुनिया की एकमात्र इस्लामिक परमाणु शक्ति संपन्न ताकत पाकिस्तान और नाटो का एक प्रमुख सदस्य देश होने के नाते तुर्की—इन तीनों का यह सैन्य गठजोड़ पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच बेहद अहम है। वर्तमान में ईरान में जारी संघर्ष और संपूर्ण क्षेत्र में फैली अस्थिरता के माहौल के बीच, इन तीनों देशों का यह बढ़ता हुआ सैन्य सहयोग संभावित हमलों को रोकने और अपनी साझा रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।