इंदौर: मध्य प्रदेश के आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) में रविवार को एक बेहद अनूठी और आधुनिक सुविधा का शुभारंभ किया गया, जो यहां आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के अनुभव को पूरी तरह से बदलकर रख देगी। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के पहले अत्याधुनिक 'वर्चुअल चिड़ियाघर' का औपचारिक लोकार्पण किया। लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस विशेष 14-D सिनेमा थिएटर और वर्चुअल जंगल सफारी के शुरू होने से अब लोगों को वन्यजीवों की रोमांचक दुनिया का एक बिल्कुल नया और जीवंत अनुभव प्राप्त होगा।

इस भव्य लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों और स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ 14-D सिनेमा हॉल में बैठकर विशेष फिल्म का लुत्फ उठाया। जैसे ही बड़ी स्क्रीन पर घने जंगलों और वन्यजीवों के दृश्य उभरे, वैसे ही आधुनिक तकनीकी प्रभावों ने इस अनुभव को बेहद खास बना दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि इंदौर शहर लगातार नए और रचनात्मक प्रयोग करने के लिए जाना जाता है, और यह वर्चुअल जू शहरवासियों, बच्चों तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक नया और प्रमुख केंद्र बनेगा।

देश का पहला वर्चुअल चिड़ियाघर बना आकर्षण का केंद्र

कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में विकसित किया गया यह वर्चुअल चिड़ियाघर सामान्य रूप से फिल्म देखने के अनुभव से पूरी तरह अलग है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से दर्शक केवल स्क्रीन पर जंगल और जानवरों को आते-जाते नहीं देखेंगे, बल्कि वे खुद को सीधे घने जंगल के बीच महसूस करेंगे।

वर्चुअल जंगल सफारी के माध्यम से दर्शकों को जंगल का प्राकृतिक माहौल, वन्यजीवों की मनमोहक गतिविधियां और विभिन्न भौगोलिक दृश्य दिखाए जाएंगे। इस अनोखी सुविधा का सबसे बड़ा लाभ उन बच्चों और प्रकृति प्रेमियों को मिलेगा, जो किन्हीं कारणों से वास्तविक जंगलों की सफारी पर जाने में असमर्थ रहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पूरी सुविधा का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद इसकी तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इंदौर जिस भी कार्य को हाथ में लेता है, उसे पूर्ण उत्कृष्टता के साथ पूरा करने का प्रयास करता है।

14-D सिनेमा: जहां सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि महसूस होगा जंगल

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका हाई-टेक 14-D सिनेमा थिएटर है। सामान्य सिनेमाघरों में जहां दर्शक केवल पर्दे पर चल रही तस्वीरों और आवाज़ों का अनुभव करते हैं, वहीं इस 14-D थिएटर में स्क्रीन पर चल रहे दृश्यों के साथ कई प्रकार के वातावरणीय प्रभावों (इफेक्ट्स) को जोड़ा गया है।

  • यदि फिल्म के दृश्य में बारिश हो रही है, तो दर्शकों को पानी की हल्की बूंदों का अहसास कराया जाता है।

  • हवा के दृश्यों के दौरान चेहरे पर हवा का झोंका महसूस होता है।

  • इसके अलावा, सीटों की हलचल, कंपन, कोहरा (फॉगर) और अन्य कई सेंसरी इफेक्ट्स फिल्म के दृश्यों के साथ तालमेल बिठाकर बदलते रहते हैं।

साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर तैयार प्रोजेक्ट

इंदौर के प्राणी संग्रहालय में बने इस 14-D सिनेमा थिएटर और वर्चुअल जंगल सफारी को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह प्रोजेक्ट जू की पारंपरिक सुविधाओं से हटकर एक अनूठा और आधुनिक आयाम जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि यह वर्चुअल जंगल सफारी आम जनता के मनोरंजन का बड़ा साधन बनने के साथ-साथ नगर निगम के लिए राजस्व (आमदनी) का एक नया जरिया भी साबित होगी।

स्कूली बच्चों के लिए शिक्षा और मनोरंजन का बेहतरीन माध्यम

प्राणी संग्रहालय में प्रतिदिन हजारों की संख्या में बच्चे और परिवार पहुंचते हैं। ऐसे में यह वर्चुअल जंगल सफारी बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन को एक साथ जोड़ने का बेहतरीन कार्य करेगी। सामान्यतः बच्चे किताबों में शेर, बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के बारे में केवल थ्योरी पढ़ते हैं, लेकिन जब वे स्क्रीन पर जंगल के सजीव वातावरण को देखते हैं और विभिन्न प्रभावों को महसूस करते हैं, तो वह ज्ञान उनके मानस पटल पर लंबे समय तक अंकित रहता है।

लोकार्पण कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल जंगल सफारी का भी विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने वहां की तकनीकी व्यवस्थाओं को समझा और संबंधित अधिकारियों से इसकी कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी प्राप्त की।