मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान के विरोध में शुक्रवार की शाम स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा एक उग्र और जोरदार प्रदर्शन किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और स्थानीय कांग्रेस कार्यालय से लेकर चाक मोड़ तक पैदल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार को लेकर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया।

चाक मोड़ तक गूंजे विरोध के तीखे नारे

शुक्रवार शाम करीब 5 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय से आरंभ हुआ यह पैदल मार्च शहर के तमाम प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए चाक मोड़ पर जाकर संपन्न हुआ। कार्यकर्ताओं के हाथों में पार्टी के झंडे और विरोध प्रदर्शन से जुड़े बैनर-पोस्टर थे। गगनभेदी नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने खड़गे के कथित अपमान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि इस पूरे मामले में संलिप्त और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रशासन तत्काल सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करे।

पूर्व विधायक बन्ना बोले—'सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा'

इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक मतभेद और वैचारिक असहमति स्वस्थ लोकतंत्र का एक सामान्य हिस्सा हो सकते हैं, परंतु किसी वरिष्ठ और सम्मानित राष्ट्रीय नेता की गरिमा को ठेस पहुंचाना पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सामाजिक समानता, मान-सम्मान और देश के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से अपनी आवाज बुलंद करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

जिलाध्यक्ष हरिलाल कोल ने भी जताई कड़ी नाराजगी

जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिलाल कोल ने इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार या विपक्ष से असहमति जताने के लिए पर्याप्त जगह और माध्यम हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शालीनता, मर्यादा और आपसी सम्मान बनाए रखना हम सबका सामूहिक दायित्व है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस सत्याग्रह के माध्यम से अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराते हुए इस संपूर्ण प्रकरण में दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

मऊगंज शहर की सड़कों पर हुआ कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल एक मामूली राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक गरिमा और राजनीतिक मर्यादा से जोड़ते हुए अपनी एकजुटता और ताकत का स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है।