भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र और आक्रामक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों से सक्रिय मजबूत मौसम तंत्र के कारण प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में महज 24 घंटे के भीतर लगभग 7 इंच पानी बरसने से निचले इलाकों और प्रमुख कॉलोनियों में गंभीर जलभराव की स्थिति बन गई है। कई मुख्य मार्ग और रास्ते पानी में डूब चुके हैं, जबकि उफनती नदियों और नालों के कारण जनजीवन और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

इन जिलों में भारी बारिश का हाहाकार और जनजीवन प्रभावित

बारिश का सबसे भयंकर असर भोपाल, सीहोर, शाजापुर, विदिशा, मंडला और राजगढ़ में देखने को मिला है। राजगढ़ के ब्यावरा में रेलवे अंडरपास के पूरी तरह डूबने से करीब 25 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। वहीं, विदिशा में अचानक आई बाढ़ के पानी में 17 लोग फंस गए, जिन्हें प्रशासनिक बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। लगातार हो रही भारी बारिश और जलभराव के मद्देनजर भोपाल और आगर-मालवा जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में नदी, नालों और पानी से भरे रास्तों के पास न जाएं।

भारी बारिश का अलर्ट और बांधों का बढ़ता जलस्तर

मौसम विभाग ने मंगलवार को नीमच, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश का दौर लगातार जारी रहने की संभावना है। इस मूसलाधार बारिश का सीधा असर जलाशयों पर पड़ा है। जोहिला बांध के दो गेट खोलने पड़े हैं, जबकि भोपाल के कलियासोत, केरवा और सीहोर के कोलार बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। अकेले भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट ऊपर उठ चुका है।

12 अगस्त के आसपास नया कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने की संभावना

मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 10 अगस्त को उत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण के कारण प्रदेश में भारी बारिश हुई। अब उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो गया है, जिसके प्रभाव से 12 अगस्त के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना है। इसे देखते हुए अगले चार दिन मध्य प्रदेश के मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

बारिश के आंकड़े और सामान्य से पीछे रहने की स्थिति

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 19 इंच यानी 483 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, सामान्य तौर पर इस अवधि तक 22.5 इंच (571.4 मिलीमीटर) पानी गिर जाना चाहिए था, जिसके चलते प्रदेश अभी भी सामान्य कोटे से लगभग 15 प्रतिशत पीछे चल रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 13 प्रतिशत है। राज्य के करीब 46 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिसमें जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के जिले प्रमुख हैं। इसके विपरीत भोपाल, गुना, सीहोर, ग्वालियर और खरगोन जैसे जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिरा है। जून महीने में 14 प्रतिशत की कमी के साथ कमजोर शुरुआत करने वाले मानसून ने जुलाई के अंत में रफ्तार पकड़कर कोटा जरूर पूरा किया, लेकिन अब अगस्त का नया सिस्टम बारिश के इन आंकड़ों को और बेहतर बनाने की उम्मीद जगा रहा है।