छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले बड़ा मलहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की एक बेहद अमानवीय और लज्जाजनक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में डेड बॉडी वैन (शव वाहन) उपलब्ध न होने के कारण मृतकों के शवों को ले जाने के लिए नगर परिषद की कचरा उठाने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों और संगठनों में भारी आक्रोश
सामने आई इस अमानवीय घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि यह शर्मनाक तरीका मृतक की गरिमा और मान-सम्मान के पूरी तरह खिलाफ है। उनका आरोप है कि अस्पताल का दर्जा अपग्रेड किए जाने के बावजूद आज तक यहां शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा तक मुहैया नहीं कराई जा सकी है, जिससे परिजनों को अपने प्रियजनों के अंतिम समय में भी दुखों के साथ ऐसी जिल्लत झेलनी पड़ती है।
कचरे की गाड़ी में शव ढुलाई से व्यवस्था की खुली पोल
तीखी आलोचनाओं का सामना कर रहे इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। लोगों का कहना है कि जिस वाहन का उपयोग शहर या अस्पताल का कूड़ा-कचरा साफ करने के लिए किया जाता है, उसी गाड़ी में शवों को ढोना शासन और प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। इस घटना के बाद से आम जनता में स्वास्थ्य विभाग के प्रति काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है और लोग जल्द से जल्द सुधार की मांग कर रहे हैं।
बीएमओ ने बजट अभाव का हवाला देकर पल्ला झाड़ा
इस पूरे मामले पर जब बड़ा मलहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. हेमंत मरैया से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल के लिए शव वाहन खरीदने या आवंटन के लिए कई बार उच्च स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। हालांकि, अब तक इसके लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ है, जिसके कारण मजबूरी में नगर परिषद के इस वाहन की मदद लेनी पड़ती है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि बजट मिलते ही जल्द से जल्द स्थायी शव वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी।





