अगर आप मानसून के इन दिनों में अजमेर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो जिले के सराधना गांव से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन गौरी माता मंदिर यात्रा को आध्यात्मिक और यादगार बना सकता है. पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है. बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है. मंदिर के पास पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं और ठंडी हवाएं वातावरण को बेहद सुकूनभरा बना देती हैं.
मंदिर के पुजारी बताते है कि मंदिर में विराजमान गौरी माता की प्रतिमा स्वयंभू प्रकट हुई थी।यह धाम हजारों वर्षों से लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माता के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है कुंड का पानी
पुजारी आगे बताते हैं कि मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन गौरीकुंड भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. इस कुंड का जल गंगा के समान पवित्र माना जाता है. यह जल सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है, कहा जाता है कि इस जल का सेवन करने से कई रोग दूर हो जाते हैं. लोग गौरी माता मंदिर के दर्शन के साथ-साथ कुंड को भी आस्था का केंद्र मानते हुए  इसमें सिक्के डालकर मन्नत मांगते है.
कैसे पहुंच सकते है यहां?
यदि आप गौरीकुंड माता मंदिर आने की योजना बना रहे हैं, तो यहां आने के लिए निजी वाहन से यात्रा करना सबसे सुविधाजनक है क्योंकि यहां केवल सराधना गांव तक ही रोडवेज बस,टेंपो , रिक्शा आवागमन के लिए मिलते हैं. गांव से मंदिर तक लगभग 5 किलोमीटर का पहाड़ी मार्ग तय करना पड़ता है इसके लिए निजी वाहन करा कर ही आना पड़ता है. मंदिर गांव के अंदर और पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण दिन के समय ही भ्रमण करना उचित माना जाता है, रात के समय यहां पर्याप्त रोशनी नहीं होने से काफी अंधेरा रहता है.