नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा घोषित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर अब राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी द्वारा टास्क फोर्स के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी की योग्यताओं पर उठाए गए सवालों के बाद सत्ता पक्ष और सहयोगी दलों ने उनके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ-साथ अब शिवसेना के नेताओं ने भी इस टिप्पणी को देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक का अपमान बताते हुए प्रियंका गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

वैज्ञानिक पर टिप्पणी को लेकर प्रियंका गांधी चौतरफा घिरीं

सदन में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के गठन और उसके सदस्यों की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी की थी। इस बयान पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक पर इस प्रकार की बयानबाजी करना बेहद दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता तथ्यहीन बातें करके जनता को गुमराह करने और अपनी पिछली सरकारों की विफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही हैं।

शिवसेना नेता संजय निरूपम का पलटवार और माफी की मांग

शिवसेना नेता संजय निरूपम ने इस मामले पर प्रियंका गांधी को नसीहत देते हुए सोशल मीडिया पर प्रोफेसर कामाकोटी की शैक्षणिक योग्यताओं का पूरा ब्योरा साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर कामाकोटी न केवल आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं, बल्कि वे आधुनिक तकनीक, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और वर्ष 2011 की आईआईटी परीक्षाओं के सफल संचालन का विस्तृत अनुभव रखते हैं। निरूपम ने कहा कि वैज्ञानिकता की आड़ में भारतीय परंपराओं और विद्वानों का उपहास उड़ाना सर्वथा अनुचित है, इसलिए कांग्रेस नेता को प्रोफेसर कामाकोटी से अविलंब माफी मांगनी चाहिए।