ग्वालियर: देश के प्रतिष्ठित राजघरानों में शामिल सिंधिया परिवार के लगभग 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य के पैतृक संपत्ति विवाद में ग्वालियर जिला अदालत के समक्ष हुई सुनवाई बेनतीजा रही। कयास लगाए जा रहे थे कि कई दशकों से चला आ रहा यह पारिवारिक मतभेद अदालत में आपसी सहमति के साथ सुलझ जाएगा, परंतु ऐसा नहीं हो सका। इसका मुख्य कारण यह रहा कि पिछली सुनवाई में कोर्ट द्वारा मांगे गए संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज इस बार पेश नहीं किए जा सके।
दस्तावेजों के अभाव में टली सुनवाई
ग्वालियर जिला न्यायालय ने मामले से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। अदालत ने साफ किया है कि जब तक संपत्ति से जुड़ा मूल रिकॉर्ड सामने नहीं आता, तब तक मालिकाना हक पर अंतिम फैसला लेना संभव नहीं है।
विलय पत्र की मूल प्रति जमा करने के आदेश
अदालत ने सुनवाई के दौरान स्वतंत्रता के उपरांत रियासतों के भारत संघ में विलय के समय तैयार किए गए ऐतिहासिक 'कॉवेनेंट' (विलय पत्र) की प्रति भी तलब की है। कोर्ट का मानना है कि इस कॉवेनेंट के गहन अध्ययन के बाद ही यह कानूनी रूप से स्पष्ट हो पाएगा कि किस-किस संपत्ति पर किसका वास्तविक अधिकार है और किन संपत्तियों का सरकार को हस्तांतरण किया जाना है।
कॉवेनेंट के आधार पर तय होगा मालिकाना हक
आजादी के समय हुए इस ऐतिहासिक समझौते के रिकॉर्ड के आधार पर ही सिंधिया परिवार के सदस्यों और शासन के बीच जायदाद का वैधानिक बंटवारा तय किया जाएगा। फिलहाल सभी पक्षों को अगली तय तारीख तक अदालत द्वारा मांगे गए सभी मूल दस्तावेजों और विलय पत्र की कॉपियां जमा करनी होंगी।





