रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भाठागांव क्षेत्र में सरकारी सड़क की आरक्षित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला हेरफेर का मामला प्रकाश में आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर जिला कलेक्टर के समक्ष एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें राजस्व विभाग के शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताते हुए एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि जो जमीन दशकों से सरकारी दस्तावेजों में सार्वजनिक सड़क के रूप में दर्ज थी, वह अब अचानक डिजिटल ऑनलाइन पोर्टल पर एक निजी भूस्वामी के नाम पर प्रदर्शित हो रही है, जिसने समूचे प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
वर्ष 1978 से शासकीय सड़क के रूप में आरक्षित थी विवादित भूमि
प्रशासनिक स्तर पर सौंपे गए शिकायत पत्र के दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम भाठागांव स्थित खसरा क्रमांक 639/11 वर्ष 1978 से लेकर अब तक के सभी पारंपरिक और सरकारी राजस्व अभिलेखों में निरंतर 'शासकीय सड़क भूमि' के रूप में ही दर्ज रहा है। कानूनन और राजस्व नियमावली के मुताबिक, इस प्रकार की भूमि पूरी तरह से सार्वजनिक निस्तार और आम जनता के उपयोग के लिए सुरक्षित (आरक्षित) मानी जाती है। नियमों के तहत ऐसी किसी भी सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर किसी भी परिस्थिति में किसी निजी व्यक्ति का मालिकाना हक (स्वामित्व) दर्ज या नामांतरित नहीं किया जा सकता।
डिजिटल बी-1 रिकॉर्ड में रातों-रात निजी नाम दर्ज होने का सनसनीखेज दावा
इस गंभीर मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता बलबीर सिंह का कहना है कि जब उन्होंने वर्तमान ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड (डिजिटल लैंड रिकॉर्ड) की जांच की, तो यह खसरा नंबर किसी निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्वामित्व वाली सड़क की भूमि को किसी निजी व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर करना बेहद गंभीर प्रशासनिक अनियमितता, पद के दुरुपयोग और भू-अभिलेखों में सोची-समझी साजिश के तहत की गई जालसाजी (रिकॉर्ड टैंपरिंग) का प्रत्यक्ष प्रमाण है। शिकायतकर्ता ने पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए एक स्वतंत्र टास्क फोर्स से इसकी जांच कराने की गुहार लगाई है।
कलेक्टर के समक्ष रखी गईं ये 3 प्रमुख और कड़ी मांगें:
-
दस्तावेजों का फॉरेंसिक ऑडिट: शिकायत में जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की गई है कि संबंधित खसरा नंबर के शुरुआत से लेकर अब तक के सभी नामांतरण (Mutation Orders), मिसल बंदोबस्त, डिक्री और वर्तमान डिजिटल रिकॉर्ड की कड़ाई से विस्तृत स्क्रूटनी की जाए।
-
दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई: यह बारीकी से पता लगाया जाए कि आखिर किस प्रक्रिया, किस त्रुटिपूर्ण आदेश या किस राजस्व अधिकारी के लॉगिन आईडी और डिजिटल हस्ताक्षर के आधार पर यह सरकारी भूमि निजी खाते में स्थानांतरित हुई। यदि जांच में किसी भी पटवारी, आरआई, तहसीलदार या अन्य कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
-
अवैध नामांकन को तत्काल निरस्त करना: शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि यह नामांतरण अवैध या नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो इस फर्जी एंट्री को तुरंत प्रभाव से निरस्त (Cancel) किया जाए और जमीन को पुनः शासकीय सड़क के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में बहाल किया जाए। इसके साथ ही भविष्य में सरकारी संपत्तियों की ऐसी ऑनलाइन चोरी को रोकने के लिए डिजिटल सुरक्षा के प्रभावी कदम उठाए जाएं।





