भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं की अनियंत्रित बयानबाजी पर अब कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर ली गई है। लगातार आ रहे ऐसे बयानों, जिनसे संगठन को सियासी तौर पर नुकसान उठाना पड़ा और विपक्षी दल को घेरने का अवसर मिला, के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी अब ऐसे नेताओं का लेखा-जोखा तैयार कर रही है। इस सूची को शीघ्र ही केंद्रीय नेतृत्व (हाईकमान) को प्रेषित किया जाएगा, ताकि अनुशासनहीनता करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा सकें।

विवादित बयान देने वाले नेताओं की बनेगी सूची

पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रादेशिक नेतृत्व का यह स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक मंचों से नेताओं द्वारा की जाने वाली व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी और आंतरिक खींचतान से संगठन की साख प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब उन चेहरों को चिह्नित किया जा रहा है, जो बार-बार अपने बयानों से दल के लिए असहज स्थिति पैदा करते हैं। आने वाले समय में ऐसे नेताओं को न केवल कड़ी चेतावनी दी जाएगी, बल्कि उनके खिलाफ दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।

वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी से बढ़ी असहजता

हालिया घटनाक्रमों में मध्य प्रदेश कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ चेहरों की टिप्पणियां काफी सुर्खियों में रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास 12 विभागों के होने पर उठाए गए सवालों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी विफलता की सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होगी। इस तरह के बयानों के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी आपसी मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जिससे केंद्रीय दखल की मांग उठने लगी है। पहले भी कई मौकों पर नेताओं के बयानों के कारण पार्टी को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा है।

अनुशासन और एकजुटता पर कांग्रेस का ध्यान

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि सत्तारूढ़ दल के खिलाफ राजनीतिक मुकाबला केवल एक मजबूत, अनुशासित और एकजुट संगठन के बल पर ही जीता जा सकता है। इसी सोच के तहत अब यह साफ संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि मर्यादा से बाहर जाकर की गई बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में नेताओं की हर सार्वजनिक गतिविधि और वक्तव्य पर पैनी नजर रखी जाएगी और उल्लंघन होने पर तुरंत उचित कार्रवाई की जाएगी।