रायपुर| रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर अभियान को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने दशकों से वहां निवास कर रहे गरीब परिवारों के आशियानों को बिना किसी उचित कानूनी सुनवाई के जमींदोज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस इस पूरी दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और आगामी विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर सदन में सरकार को घेरेगी।
'दशकों से रह रहे परिवारों को जबरन किया गया बेघर'
दीपक बैज ने विस्थापितों का पक्ष लेते हुए कहा कि नकटी गांव के प्रभावित लोग पिछले 20 से 40 वर्षों से वहां शांतिपूर्ण ढंग से जीवन बसर कर रहे थे। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन ने उनकी न्यायसंगत आपत्तियों और अपीलों को पूरी तरह नजरअंदाज कर बुलडोजर चला दिया। उन्होंने दावा किया कि इस तोड़फोड़ अभियान की जद में आकर प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने वैध मकान भी मलबे में तब्दील हो गए, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
विधायक आवासीय परियोजना के औचित्य पर खड़े किए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार अपने जनप्रतितिधियों के लिए प्रस्तावित आलीशान विधायक कॉलोनी का निर्माण करना चाहती है और इसके लिए गरीब परिवारों को उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नया रायपुर क्षेत्र में पहले से ही भारी मात्रा में खाली सरकारी जमीन मौजूद है, तो फिर इस घनी आबादी वाले गरीब इलाके को उजाड़ने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस बेदखली से पहले प्रभावितों के साथ कोई संवाद या बैठक भी नहीं की गई।
अधूरी पुनर्वास व्यवस्था को लेकर जताई भारी नाराजगी
शासन द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हुए दीपक बैज ने कहा कि बड़े और संयुक्त परिवारों को महज एक कमरे का छोटा सा मकान आवंटित करना पूरी तरह अव्यावहारिक है। उन्होंने जमीनी हकीकत बताते हुए दावा किया कि जिन नए आवासों में लोगों को शिफ्ट होने के लिए मजबूर किया जा रहा है, वहां बिजली, सड़क और पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि इन सरकारी मकानों की कुल लागत का आर्थिक बोझ आखिरकार कौन वहन करेगा?
पूरे प्रदेश में दहशत और असुरक्षा का माहौल
विपक्ष का कहना है कि नकटी गांव की इस एकतरफा कार्रवाई के बाद से राज्य के अन्य इलाकों की गरीब बस्तियों में भी बेघर होने का डर और असुरक्षा की भावना घर कर गई है। दीपक बैज ने जानकारी दी कि कांग्रेस के विधायकों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में मानवीय आधार पर दखल देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों से भी भावुक अपील की कि वे ऐसे किसी भी सरकारी आवास को स्वीकार न करें, जो किसी गरीब का घर उजाड़कर तैयार किया जा रहा हो।
पारदर्शी जांच और सम्मानजनक मुआवजे की मांग
कांग्रेस ने सूबे की सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा है कि जिन लोगों के आशियाने तोड़े गए हैं, उन्हें तत्काल उचित और पर्याप्त मुआवजा राशि दी जाए। साथ ही, उसी क्षेत्र के नजदीक उनका सम्मानजनक पुनर्वास तय किया जाए। इसके अलावा, पूरी आवासीय परियोजना के तहत आने वाली जमीन का सीमांकन सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए और इस पूरी कार्रवाई की एक निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कमेटी गठित की जाए।





