इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को भारत द्वारा निलंबित किए जाने के फैसले से पाकिस्तान में भारी बौखलाहट और बेचैनी का माहौल है। वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कोई समर्थन न मिलने के बाद, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के लिए मंगलवार को एक ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ (अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन) का आयोजन किया। इस सम्मेलन में पाकिस्तानी नेताओं ने सिंधु जल समझौते को दोबारा पूरी तरह बहाल करने की पुरजोर वकालत की। हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि पूरे मंच से पाकिस्तानी नेता भारत का सीधा नाम लेने से बचते दिखे और उसकी जगह 'ताकतवर देश' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहे। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह रुख दर्शाता है कि पिछले साल भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई का खौफ उस पर किस कदर हावी है।

ताकतवर देशों द्वारा समझौते रद्द करने पर उठाए सवाल

सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी सांसद मुसादिक मलिक ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की प्रासंगिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ताकतवर देश केवल अपनी मर्जी से किसी द्विपक्षीय समझौते को एकतरफा रद्द या निलंबित नहीं कर सकता। मलिक ने तर्क दिया कि वैश्विक कानूनों की असली परीक्षा तब होती है जब वे किसी कमजोर देश के हितों की रक्षा करें। उन्होंने भारत के इस कदम को अनैतिक और घातक बताते हुए इसकी तुलना इतिहास की विनाशकारी घटनाओं से कर दी। हालांकि, पाकिस्तान इस सम्मेलन में यह स्वीकार करने से बचता रहा कि भारत को यह कड़ा कदम उठाने के लिए खुद पाकिस्तान की सरजमीं से पनपने वाले आतंकवाद ने मजबूर किया है।

'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'

दरअसल, पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बेहद कायराना आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बर्बरता के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ संदेश दिया था कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'। इसी के परिणामस्वरूप भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इसके साथ ही, पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था, जिसके बाद से पाकिस्तान लगातार वैश्विक मंचों पर गुहार लगा रहा है।

जलमार्गों को हथियार बनाने के खिलाफ नए वैश्विक नियम की मांग

इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी भी मंच पर मौजूद थे। इशाक डार ने भारत के निलंबन के फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए दावा किया कि यह संधि कानूनी रूप से अब भी वैध और प्रभावी है, क्योंकि कोई भी एक पक्ष इसे अकेले समाप्त नहीं कर सकता। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु नदी की तुलना दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से कर दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नदियों और जलमार्गों को भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के लिए एक नए वैश्विक सम्मेलन का प्रस्ताव भी रखा।

डेटा रुकने से दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर पाकिस्तान

सिंधु जल समझौते के रुकने और भारत की ओर से कड़े कदम उठाए जाने के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पूरी तरह चरमरा गए हैं। भारत द्वारा नदियों से जुड़े हाइड्रोलॉजिकल डेटा (जल विज्ञान संबंधी आंकड़े) साझा न किए जाने के कारण पाकिस्तान के लिए बाढ़ या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का पहले से अनुमान लगाना और उनसे निपटना बेहद मुश्किल हो गया है। चूंकि पाकिस्तान की पूरी कृषि व्यवस्था और पनबिजली (हाइड्रो पावर) परियोजनाएं मुख्य रूप से सिंधु नदी के पानी पर ही निर्भर हैं, इसलिए भारत के इस कड़े रुख ने पाकिस्तान के सामने भुखमरी और गहराते जल संकट की गंभीर स्थिति पैदा कर दी है।