पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कथित रिशुश्री महाघोटाला मामले को लेकर सूबे की सरकार पर एक बार फिर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में हजारों करोड़ रुपये का यह बड़ा घोटाला हुआ है और पिछले 21 सालों से शासन कर रहे एनडीए गठबंधन को अब प्रदेश की जनता के सामने स्थिति साफ करनी चाहिए। तेजस्वी ने सरकार के सामने 20 तीखे सवाल रखते हुए कहा कि हालांकि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं, लेकिन मुख्य आरोपियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उनका आरोप है कि सरकार केवल छोटे दर्जे के अधिकारियों और कर्मचारियों को मोहरा बनाकर शीर्ष स्तर पर बैठे रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिशों में जुटी है।

टेंडर प्रक्रिया और आईएएस अफसरों के प्रभाव पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य रूप से टेंडर आवंटन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक साधारण ठेकेदार बताए जा रहे रिशुश्री के पास विभिन्न सरकारी विभागों के टेंडर अपनी मर्जी से तय करने की ताकत कहां से आई। उन्होंने कहा कि अगर इतने बड़े पैमाने पर खेल हो रहा था, तो सरकार का पूरा निगरानी तंत्र इतने सालों तक आंखें मूंदे क्यों बैठा रहा। तेजस्वी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का हवाला देते हुए कहा कि सामने आए चैट संदेशों से साफ होता है कि रिशुश्री की पैठ कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों तक थी। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे किसका राजनीतिक और प्रशासनिक वरदहस्त मिला हुआ था, जिसके दम पर वह बड़े अधिकारियों को निर्देश दे रहा था।

जांच एजेंसियों की चार्जशीट और अधूरी कार्रवाई पर घेरा

तेजस्वी यादव ने विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की चार्जशीट की प्रामाणिकता पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने सवाल किया कि जिन दो आईएएस अधिकारियों को विभाग ने निलंबित किया है, उनके नाम इस चार्जशीट से नदारद क्यों हैं और उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। उन्होंने भाजपा और जदयू पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार करने वालों को बचाया जा रहा है और शायद सरकार को यह डर है कि कड़े कदम उठाने पर पूरा नेटवर्क बेनकाब हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने वित्त, जल संसाधन और भवन निर्माण जैसे प्रभावित विभागों में मंत्रियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति, कमीशनखोरी और पक्षपात का आरोप

अपने सवालों की झड़ी में उन्होंने जांच के दौरान सामने आई दो से साढ़े तीन प्रतिशत की तय कमीशन व्यवस्था का जिक्र करते हुए सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को पूरी तरह खोखला बताया। तेजस्वी ने रिशुश्री के पास से मिलीं 99 संपत्तियों के दस्तावेजों, भारी नकदी और अधिकारियों को कराई गई विदेशी यात्राओं के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राज्य की खुफिया और आर्थिक अपराध इकाइयां इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर कैसे रहीं। अंत में उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि जब भी किसी बड़े घोटाले में दबाव बढ़ता है, तो कार्रवाई की गाज अक्सर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारियों पर ही गिराई जाती है, जबकि मुख्य योजनाकार बच निकलते हैं।