गोरखपुर/देवरिया: उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों (2027) की तैयारियों का दौर जैसे-जैसे तेज हो रहा है, राजनीतिक मुलाकातों और नए समीकरणों का सिलसिला भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक अचानक हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ने देवरिया में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद गोरखपुर पहुंचने से पहले, देवरिया के पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के आवास पर जाकर उनसे खास भेंट की। यह मुलाकात न केवल राजनीतिक विश्लेषकों बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है, जहां लोग इसके गहरे सियासी मायने तलाश रहे हैं।

ब्राह्मण समाज को साधने का बड़ा संदेश

राजनीतिक विशेषज्ञ इस मुलाकात को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा ब्राह्मण समाज को साधने के एक अहम और रणनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) जनेश्वर मिश्रा की जयंती के मौके पर एक बड़ा ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुटी है, जिसकी रणनीतियों को हाल ही में लखनऊ में अंतिम रूप दिया गया था। श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का परिवार पूर्वांचल और विशेषकर देवरिया के ब्राह्मण समाज में कई पीढ़ियों से गहरी प्रतिष्ठा रखता है। लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था और 1996 व 1999 में देवरिया से भाजपा के सांसद चुने गए। उन्हें देवरिया से भाजपा का पहला सांसद होने का गौरव भी प्राप्त है।

2027 में इतिहास दोहराने की चुनौती

भाजपा के सामने आगामी विधानसभा चुनावों में देवरिया में अपने पिछले शानदार रिकॉर्ड को दोहराने की बड़ी चुनौती है। पार्टी ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी सातों सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विपक्ष का पूरी तरह सूपड़ा साफ कर दिया था। इससे पहले 2017 में भी देवरिया ने 7 में से 6 सीटें भाजपा की झोली में डाली थीं, तब केवल एक भाटपाररानी की सीट उसके खाते में नहीं आई थी। हालांकि, 2022 में भाजपा के सभाकुंवर ने समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले भाटपाररानी में भी कमल खिलाकर वह कसर पूरी कर दी थी।

2017 और 2022 की इन दोनों बड़ी जीतों में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक रही थी। ऐसे में सीएम योगी की इस अहम मुलाकात को ब्राह्मण समाज के भीतर भाजपा के प्रति किसी भी तरह की नाराजगी या असहजता को दूर करने और उनका पुराना समर्थन बनाए रखने के एक मजबूत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।