
इंदौर। जीवन में ऐसे मित्र कम मिलते हैं जो खुद हमेशा प्रसन्नाचित्त रहकर दूसरों को भी तनाव मुक्त रखने में मदद करते हों। गुरुवार रात 11.30 बजे तक उन्मेशजी कार्यालय में बैठकर आजीवन सदस्यता निधि और सक्रिय सदस्यता के कार्य में जुटे थे।
शुक्रवार दोपहर जब एक हादसे में उनके नहीं रहने की खबर मिली तो विश्वास नहीं हुआ। छात्र जीवन से ही वे गुजराती समाज सहित सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। भाजपा के संस्कार उनके रक्त में थे। उनके पिता स्व. गजानंद त्रिवेदी डैडी वर्षों भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे।
उन्मेशजी का विजन बेहद स्पष्ट था। भाजपा कार्यालय को हमेशा स्मार्ट ऑफिस में बदलने की कोशिश में लगे रहते थे। जिंदादिल इंसान थे, किसी की बात का बुरा नहीं मानते थे। हर कार्यकर्ता की चिंता रहती थी। कोई भी नेता आए उनकी पसंद क्या है, जानते थे।
कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आए तो उन्होंने ही तय किया कि वे गुजराती हैं तो खाने में क्या भेजा जाए। पार्टी ने मुझे नगर अध्यक्ष बनाया तो मैंने तुरंत उन्मेशजी से कहा था कि अब आपको सब संभालना है। कुछ दिन पहले भी वे पार्टी कार्यालय से रात 11.30 बजे घर पहुंचे और मैंने फोन किया कि कुछ वरिष्ठ लोग आए हैं। बगैर ना किए वे तुरंत कार्यालय पहुंचे और सारे इंतजाम किए। खुद से ज्यादा उन पर भरोसा था। ऐसे अभिन्ना मित्र का चले जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति तो है ही पार्टी को भी आघात लगा है।