
ग्वालियर। पन्ना बस हादसे के बाद अब परिवहन विभाग अपने एक्ट में बदलाव करने जा रहा है। इस बदलाव के चलते इमरजेंसी खिड़की की जगह अब इमरजेंसी गेट लेगा। इसलिए विभाग ने बस संचालकों को गेट बनवाने के लिए एक महीने का समय दिया है। इसके अलावा 32 सीटर बस को 75 किमी का परमिट देने का नया प्रावधान किया जा रहा है, जबकि बस ऑपरेटर आपातकालीन दरवाजे का विरोध कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश मोटरयान अधिनियम 1994 में 32 सीटर बसों में इमरजेंसी विंडो का प्रवधान है। इस बस को 100 किमी तक का परमिट दिए जाने का नियम है, लेकिन पन्ना बस जैसे हादसे रोकने के लिए विभाग अपने अधिनियम में बदलाव कर रहा है। इस बदलाव से मध्य प्रदेश की बसों में इमरजेंसी खिड़की की जगह गेट ले लेगा।
ऑल इंडिया परमिट की बसों पर नहीं नियम लागू
ऑल इंडिया परमिट पर चलने वाली बसों पर केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम की धारा 128 लागू होती है। इस परमिट की बस में एक गेट व इमरजेंसी विंडो का प्रावधान है। ऑल इंडिया परमिट पर वॉल्वो बसों का संचालन होता है।
क्यों कर रहे हैं बस ऑपरेटर विरोध
- इरजेंसी गेट बनवाने पर ऑपरेटरों को एक सीट हटवानी होगी, जिससे उसे तीन सवारी का नुकसान होगा। साथ ही बस में गेट बनवाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इसके चलते बस ऑपरेटर विरोध कर रहे हैं।
-2012 में सेंधवा बस हादसे के बाद विभाग ने 32 सीटर बस की दूरी 150 किमी से घटाकर 100 किमी की थी। अब पन्ना हादसे के बाद एक्ट में बदलाव कर परमिट की दूरी 75 किमी की जा रही है।
- मप्र मोटरयान एक्ट 1994 में बदलाव किया जा रहा है। बस में इमरजेंसी विंडो की जगह गेट का प्रावधान किया जा रहा है। इसलिए बस संचालकों को शर्तें पूरा करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।