
भोपाल : मध्यप्रदेश में 10वीं बोर्ड की परीक्षा में भोपाल की नंदिनी चौहान ने चौथा स्थान हासिल किया है. नंदिनी झुग्गी बस्ती रहती है और उसके पिता मजदूरी करते हैं. तमाम विपरीत हालात के बावजूद नंदिनी ने मिसाल कायम करते हुए 10वीं की मेरिट सूची में टॉप 10 में जगह बनाईं.
नंदिनी अपने परिवार के साथ शिवाजी नगर के पास झुग्गी बस्ती में रहती है. पिता मजदूरी करते है और परिवार की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है. घर में पढ़ाई का माहौल नहीं होने के बावजूद पिता रामाचल ने बेटी को प्रेरित किया और सरस्वती शिशु मंदिर में उसका एडमिशन कराया था.
रामाचल का दर्द यह था कि बेटी खूब पढ़ना चाहती थी लेकिन उनके पास उसे पढ़ाने और कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे. उनके घर के नजदीक ही रहने वाली धीरज राय ने उसकी प्रतिभा को पहचाना. काबिलियत और परिवार की कमजोर आर्थिक हालत देखते हुए उन्होंने नंदिनी को नि:शुल्क कोचिंग देने का फैसला लिया. वह भी खुश है कि उनकी कोशिश रंग लाई और नंदिनी आज प्रदेश के टॉप 10 स्टूडेंट में शुमार हो गई.
नंदिनी रिजल्ट से बेफ्रिक अपने ननिहाल में छुट्टियां बिता रही है. बेटी की गैरमौजूदगी में पिता रामाचल ने मंत्री दीपक जोशी से मेडल हासिल किया. मजदूरी करने वाले रामाचल के लिए यह जिंदगी के सबसे बड़े पल थे. बेटी ने उनका सिर फख्र से ऊंचा कर दिया. बेटी भले ही टॉप 10 में पहुंची हो लेकिन पिता मासूमियत से कहते है कि उन्हें टॉप 10 के मायने पता नहीं.
काबिलियत को सलामः:
अब उसकी मदद के लिए स्कूल के प्राचार्य रामकुमार व्यास भी आगे आए है. रिजल्ट के वक्त मौजूद रामकुमार व्यास ने कहा कि नंदिनी की 12वीं तक की पढ़ाई का खर्च खुद स्कूल उठाएगा. उन्होंने पिता से वादा किया कि नंदिनी की पढ़ाई के लिए स्कूल हरसंभव मदद करेगी.