
झाबुआ : आंतकवादी और हवस के भूखों का कोई धर्म नहीं होता यह बात एक बार फिर साबित हो गई है। छत्तीसगढ़ के झाबूआ शहर के पास मिडंल गांव की एक मासूम 12 साल की बच्ची को एक दरिंदे की हवस का शिकार होना पड़ा। इसमें उस बच्ची का कोई दोष नहीं है। घटना उस समय हुई जब यह मासूम बच्ची ललिता रोजाना की तरह अपने मवेशी को सुबह के समय चराने गई थी। पर इसे नहीं पता था यह सुबह उसके लिए इतनी मनहूश होगी की उसकी जिंदगी ही उससे छीन जाएगी। उदयपूरिया तालाब के पास एक दम सूनसान इलाके के पास हुई इस घटना ने सबको पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।
बच्ची के घर ना लौटने पर परिवार वालों ने काफी खोज करने के बाद सूचना पुलिस को दी जिसके बाद पुलिस द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई। बच्ची के शव को देख कर सबकी आंखे फटी की फटी रह गई। शव को इतनी बूरी तरह से घायल किया हुआ था कि देखने वाले के रोगंटे तक खडे हो गए। शव को गड्ढ़े में डाल कर उपर से पत्ते तथा बड़े बड़े पथर रखें हुए थे। जांच करने के बाद पता चला कि पहले बच्ची के साथ जबरन दुष्कर्म किया गया था उसके बाद बच्ची के सिर पर पत्थर मार कर उसकी हत्या कर दी गई। जब हवस के इस भूखें का पेट इतने से भी नहीं भरा तो उसने बच्ची के सिर पर बड़े पत्थरों से वार कर बूरी तरह से कुचल दिया। उसके बाद शव को कम से कम आधा किमी. तक घसीटा गया जिसके बाद उसे गड़ढे में गाड़ दिया गया।
ललिता के पिता तोलिया परमार अक्सर उदयपुरिया तालाब के आसपास स्थित जंगलों में ही जाती थी। जब गुरुवार की शाम लगभग 4 बजे तक वह नहीं लौटी तो बच्ची के घर वालों ने उसे चारों तरफ ढूंढना शुरू किया। उसके बाद रात 9 बजे ललिता के कुछ कपड़े उदयपुरिया तालाब के पास मिले। परिजनों ने रात 11 बजे थाने पहुंचकर पुलिस को सारी जानकारी दी। इसके बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। तलाश के बाद घर वालों को सुबह 4 बजे तालाब से निकलने वाले नाले के किनारे गड्ढे में उसकी लाश मिली, जो पत्तों से ढंकी हुई थी।