कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में आयोजित करम उत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुड़मी समाज हेतु कई महत्वपूर्ण एवं बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में कुड़मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी आपराधिक व अन्य मामलों को वापस लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार कुड़माली एवं राजबंशी भाषाओं को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कराने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

कुड़मी समाज पर दर्ज पुराने मामलों की वापसी का निर्णय

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने कुड़मी समाज की मांगों का समाधान करने के स्थान पर समुदाय के भीतर विभाजन उत्पन्न करने का प्रयास किया था। उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे निरस्त किए जाएंगे।

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में कुड़मी समुदाय के सर्वांगीण उत्थान एवं कल्याण हेतु ₹50 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है, जिसे आगामी समय में और अधिक बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही निष्प्रयोज्य पड़े 'कुड़मी विकास बोर्ड' को पुनः पूर्ण रूप से सक्रिय करने की बात कही गई है।

कुड़मी आंदोलन का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि कुड़मी समाज द्वारा राज्य के पश्चिमी जिलों में अपनी प्रमुख मांगों को लेकर व्यापक आंदोलन किए गए थे, जिनमें रेल व सड़क मार्ग अवरुद्ध करने की घटनाएं भी सम्मिलित थीं। समाज की मुख्य मांगों में कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्रदान करना तथा उनकी मातृभाषा कुड़माली को संवैधानिक मान्यता दिलाना शामिल रहा है।

पुरुलिया में दिए गए प्रमुख सरकारी आश्वासन

पुरुलिया जिले में जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि चुनावी संकल्प पत्र में कुड़मी समाज से किए गए प्रत्येक वादे को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में समाज की उपेक्षा की गई, किंतु वर्तमान शासन उनके सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है।

कुड़माली एवं राजबंशी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का संकल्प

संविधान की आठवीं अनुसूची में भाषाओं को सम्मिलित कराने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पश्चिमी अंचल में बोली जाने वाली कुड़माली तथा उत्तर बंगाल की प्रमुख राजबंशी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता दिलाने हेतु केंद्र सरकार के समक्ष सशक्त पक्ष रखा जाएगा। आठवीं अनुसूची में स्थान मिलने से इन भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं भाषाई अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त होगी।

विकास बोर्ड का पुनर्गठन एवं ₹50 करोड़ का बजटीय आवंटन

कुड़मी विकास बोर्ड को शीघ्र पुनर्सक्रिय करने की घोषणा करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ₹50 करोड़ की प्रारंभिक धनराशि से शिक्षा, बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक कल्याण की योजनाएं संचालित की जाएंगी। पुरानी कानूनी अड़चनों को समाप्त करने और विकास बोर्ड को गति देने के इस निर्णय को कुड़मी समुदाय की दीर्घकालिक मांगों के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।