जबलपुर: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में बोनस अंकों के आवंटन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जबलपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सभी संबंधित रिट अपीलों को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के पूर्ववर्ती आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है और अब इसी के आधार पर संशोधित मेरिट सूची तैयार कर आगे की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

क्या था पूरा मामला और विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा की चयन सूची में 5% बोनस अंक दिए जाने के नियमों को लेकर उपजा था। इस मामले की शुरुआत नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से हुई थी। याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया था कि भर्ती परीक्षा की नियम पुस्तिका की कंडिका 7.7 के प्रावधानों के अनुसार, केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को बोनस अंक मिलने का अधिकार है जिनके पास RCI से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा हो।

याचिकाकर्ताओं का यह आरोप था कि चयन मंडल द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे अयोग्य अभ्यर्थियों को भी बोनस अंक प्रदान कर दिए गए हैं जिनके पास यह अनिवार्य मान्यता प्राप्त योग्यता नहीं थी।

सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच ने ठहराया सही

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों को अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में सुधार करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किए गए थे। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक:

  • पहला सुधार अवसर 25 और 26 अगस्त 2025 को दिया गया था।

  • इसके बाद एक अन्य मामले (दीपक परमार केस) के आदेश के पालन में 26 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक दूसरी करेक्शन विंडो खोली गई।

  • इसके अतिरिक्त तीसरा मौका 4 फरवरी से 11 फरवरी 2026 तक उपलब्ध कराया गया था।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि इन तीन बार मिले स्पष्ट और लंबे अवसरों के बावजूद जिन अभ्यर्थियों ने अपनी त्रुटियों या गलत जानकारियों को नहीं सुधारा, वे परीक्षा परिणाम घोषित हो जाने के बाद अदालत से राहत की माँग नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी माना कि अपीलकर्ताओं का यह तर्क स्वीकार योग्य नहीं है कि उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म में 'हाँ' (Yes) का विकल्प केवल भूलवश चुन लिया था। परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद अपनी गलती का दावा करना स्थापित नियमों के प्रतिकूल माना जाएगा।

इससे पहले, 6 मई 2026 को जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि चयन मंडल ने केवल ऑनलाइन आवेदन में 'हाँ' का विकल्प टिक किए जाने के आधार पर बिना किसी वास्तविक दस्तावेज सत्यापन के अभ्यर्थियों को बोनस अंक दे दिए थे। सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह पूरी चयन सूची वापस लेकर RCI योग्यता का कड़ाई से सत्यापन करे और उसके बाद नई मेरिट सूची तैयार करे।

अदालत की अहम टिप्पणियाँ

डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान यह कड़ी टिप्पणी की कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान गलत या भ्रामक जानकारी देकर बोनस अंक प्राप्त करना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुचित या धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त किए गए लाभ को बाद में समानता के सिद्धांत (Article 14) के तहत कानूनी रूप से सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।

इसके साथ ही, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने और स्थापित निर्णयों (जैसे महेश कुमार बाथम बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम) का हवाला देते हुए यह भी माना कि यदि इस अंतिम चरण में पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा शून्य से खोला गया, तो इससे हजारों ऐसे योग्य अभ्यर्थियों की अंतर-वरीयता (Inter-se seniority) प्रभावित होगी जिन्होंने शुरुआत से ही पूरी तरह सही जानकारी देकर आवेदन किया था। इन तमाम कानूनी पहलुओं और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश में किसी भी प्रकार की तथ्यात्मक या कानूनी त्रुटि होने से इंकार कर दिया।