बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर शहर में खाद्य विभाग के एक फूड इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोपी अधिकारी पर बिना किसी पूर्व अनुमति या वैधानिक नोटिस के एक स्थानीय व्यापारी के घर में जबरन प्रवेश करने और वहाँ मौजूद महिलाओं के साथ आपत्तिजनक व दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है, और उन्होंने आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने की माँग को लेकर 'बीजापुर बंद' का आह्वान किया है।
निरीक्षण के नाम पर घर में घुसने का आरोप
व्यापारी संगठनों और पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, संबंधित फूड इंस्पेक्टर बिना किसी पूर्व सूचना, आधिकारिक नोटिस या पर्याप्त निरीक्षण दल के सीधे व्यापारी के निजी निवास पर पहुँच गए थे। इस दौरान अधिकारी के संदिग्ध और आपत्तिजनक व्यवहार को लेकर घर की महिलाओं ने जब कड़ा विरोध जताया, तो मामला और अधिक तूल पकड़ गया। घटना की भनक लगते ही बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति संभाली
विवाद के तूल पकड़ने की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और दोनों पक्षों को शांत कराकर उनकी बात सुनी। पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले की परिस्थितियों की विस्तार से जानकारी लेते हुए निष्पक्ष जाँच और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, आक्रोशित व्यापारियों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए और दोषी अधिकारी के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
पूर्व में भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
नाराज व्यापारियों ने यह भी दावा किया है कि उक्त अधिकारी के खिलाफ पहले भी जबरन वसूली करने और एक अन्य व्यापारी के यहाँ से कथित तौर पर 5 किलोग्राम काजू-बादाम अवैध रूप से उठाकर ले जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। इन पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई न होने के कारण व्यापारियों में प्रशासन के प्रति और अधिक नाराजगी बनी हुई है।
एफआईआर की माँग और बंद की चेतावनी
व्यापारिक संघों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द से जल्द आरोपी अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उसे निलंबित नहीं किया, तो बीजापुर बंद का यह आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा। हालांकि, अधिकारी पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। खाद्य विभाग के संबंधित अधिकारी या प्रशासन की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद इस पूरे मामले की सच्चाई और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।





