मुजफ्फरपुर:विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले की सुगबुगाहट के साथ ही मुजफ्फरपुर में प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। आगामी 30 जुलाई से शुरू हो रहे इस पावन मेले में आने वाले शिवभक्तों के लिए इस साल एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इतिहास में पहली बार, पर्यटन विभाग के सौजन्य से कांवरियों के विश्राम के लिए एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग स्थानों पर अत्याधुनिक 'टेंट सिटी' का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए फकुली के रजला चौक और आरडीएस कॉलेज परिसर को चुना गया है, जबकि इससे पहले हर साल केवल आरडीएस कॉलेज में ही यह व्यवस्था होती थी।

चार हजार भक्तों के ठहरने का इंतजाम; वाटरप्रूफ टेंट में मिलेंगी फाइव-स्टार सुविधाएं

कांवरियों की लगातार बढ़ती तादाद को देखते हुए दोनों टेंट सिटी में कुल मिलाकर कम से कम 4,000 श्रद्धालुओं के रुकने की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है। पहलेजा घाट से पवित्र गंगाजल लेकर आने वाले थके-हारे कांवरियों के आराम के लिए ये टेंट पूरी तरह से वाटरप्रूफ होंगे। इनके भीतर फोल्डिंग बेड, आरामदायक गद्दे, साफ-सुथरी चादरें और तकिए लगाए जाएंगे। इसके अलावा भक्तों के लिए शुद्ध पेयजल, स्वादिष्ट भोजन, आधुनिक शौचालय, स्नानघर, निर्बाध बिजली, पंखे और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट जैसी तमाम आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे बिल्कुल मुफ्त मिलेंगी।

चौबीस घंटे तैनात रहेंगे डॉक्टर और सुरक्षा बल; सीसीटीवी से होगी चप्पे-चप्पे की निगरानी

श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा को लेकर प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। टेंट सिटी के अंदर 24 घंटे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम आपातकालीन दवाओं, प्राथमिक उपचार किट और स्ट्रेचर के साथ मुस्तैद रहेगी। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए टेंट सिटी के भीतर और बाहरी परिसरों में भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे। पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए हर कोने को सीसीटीवी कैमरों की नजर में रखा जाएगा।

बाबा गरीबनाथ मंदिर का कायाकल्प पूरा; अरघा सिस्टम से ही होगा बाबा का जलाभिषेक

मेले के मुख्य केंद्र बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक के अनुसार, गर्भगृह के अंदर जिन स्थानों के पत्थर समय के साथ खराब हो गए थे, उन्हें पूरी तरह बदल दिया गया है और अब मंदिर के भव्य शिखर को आकर्षक रंगों से संवारा जा रहा है। इस बार भी भीड़ को नियंत्रित रखने और सुगमता से दर्शन के लिए 'अरघा सिस्टम' के जरिए ही जलाभिषेक संपन्न कराया जाएगा। साथ ही, भक्तों की सहायता के लिए 19 सेवादलों के करीब 2,000 वालंटियर्स (सेवादार) पूरे मेला क्षेत्र में चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे, जिसके लिए चयन प्रक्रिया जारी है।