देवरिया / लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने साफ किया कि जन आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आते ही त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है और बहुत जल्द 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा।

विपक्ष पर साधा निशाना, याद दिलाए पुराने दिन

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग आज आस्था की दुहाई दे रहे हैं, उनका इतिहास सब जानते हैं। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा:

  • राम के अस्तित्व पर सवाल: एक पक्ष ऐसा था जो लगातार न्यायालयों में वकीलों की फौज खड़ी करके राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का विरोध करता था और कहता था कि राम हैं ही नहीं।

  • भक्तों पर लाठी-गोली: दूसरा पक्ष वह है जिसने जय श्री राम बोलने वाले निर्दोष राम भक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाई थीं।

  • धार्मिक आयोजनों पर रोक: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के शासनकाल में रामनवमी पर दंगे होते थे, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर प्रतिबंध लगाए जाते थे, कांवड़ यात्रा निकालने की अनुमति नहीं थी और दुर्गा पूजा के दौरान अशांति फैलाई जाती थी।

"कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं, नोंचा था"

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में देश को सिर्फ लूटा ही नहीं, बल्कि नोंचा था और बेईमानी व भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे दागदार इतिहास वाले लोग आज अयोध्या और राम मंदिर पर आक्षेप लगा रहे हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

राम भक्तों की अग्नि परीक्षा न लेने की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की मंशा पहले दिन से साफ है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अपील की:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुख्य बयान: "मैं विपक्ष से अपील करूंगा कि राम भक्तों की अग्नि परीक्षा मत लो और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करो। अगर आपके पास कोई तथ्य या प्रमाण नहीं हैं, तो अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप बंद कीजिए। और यदि कोई वास्तविक प्रमाण है, तो उसे राजनीति करने के बजाय सीधे एसआईटी (SIT) के सामने पेश करें।"