इंदौर। नगर निगम बजट सत्र के दौरान नमाज पढ़े जाने का मामला गरमा गया है। निगम परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दिए जाने की खबरों को सभापति ने सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि बजट सत्र में करीब 9 घंटे तक सभी पार्षदों ने सार्थक चर्चा की, पूरे सदन की लाइव रिकॉर्डिंग भी हुई है।
किसी भी तरह की अनुमति नहीं दी गई
महापौर ने कहा कि लंच ब्रेक के दौरान सभापति ने केवल भोजन अवकाश की घोषणा की थी, नमाज के लिए किसी भी तरह की अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि व्यक्तिगत रूप से जब उन्होंने सभापति से बात की तो उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी थी। फिर भी, निगम परिसर में नमाज अदा की गई, जिसे लेकर महापौर ने कहा कि यह काम अनुमति लेकर और व्यवस्था के तहत होना चाहिए था। बिना अनुमति के ऐसा करना ठीक नहीं है। महापौर ने यह भी जोड़ा कि संबंधित पार्टी की ओर से कोई व्हिप जारी नहीं किया गया था, ऐसे में नमाज के लिए निगम परिसर के आसपास किसी अन्य स्थान का चयन किया जा सकता था।
जुम्मे की नमाज अदा करना जरूरी
पार्षद रुबीना इकबाल खान ने कहा, “मैं पिछले 12 साल से पार्षद हूं और पहले भी कई बार यहां नमाज पढ़ चुकी हूं। यह यूपी नहीं, इंदौर है। अगर नमाज पढ़ भी ली तो क्या फांसी पर चढ़ा दोगे? हम नमाज पढ़ रहे थे, बम लेकर नहीं गए थे।” अब क्या बैठकर उल्टी नमाज पढ़े। यह इंदौर है और यहां पर हिंदू मुस्लिम आपस में भाई है। यह तो सरासर गलत है वह तो जुम्मे का दिन था इसलिए जुम्मे की नमाज अदा करना जरूरी होता है और अगर अन्य कोई दिन होता तो घर जाकर कजा नमाज अदा कर लेते। मामले को लेकर नगर निगम और पार्षदों के बीच तनातनी तेज हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस पर चर्चा हो रही है कि बिना अनुमति धार्मिक क्रिया-कलापों की इजाजत कैसे दी जा सकती है।
पार्षद को बर्खास्त करें
संस्कृति बचाओ मंच निगम परिसर में नमाज पढ़ने पर विरोध जताया है। मंच के चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि इंदौर में जिस प्रकार शासकीय कार्यालय में महिलाएं नमाज पड़ रही है कल संस्कृति बचाओ मंच वहां पर हनुमान चालीसा और अखंड रामायण के पाठ भी करना प्रारंभ करेगी। इसलिए सरकार इनको सस्पेंड करें और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।