अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों से आने वाले आयातों पर नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले से दुनिया के कई देशों को झटका लग सकता है, लेकिन भारत के कपड़ा उद्योग के लिए यह एक बड़ा अवसर बन सकता है। वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों को अमेरिकी बाजार में अपने कपड़े बेचने के लिए अब ज्यादा शुल्क चुकाना होगा। इससे भारत की कपड़ा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का बढ़िया मौका मिलेगा।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत की तुलना में वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर अमेरिका ने अधिक टैरिफ लगाया है। वियतनाम के कपड़ों पर 46%, बांग्लादेश के कपड़ों पर 37% और चीन के कपड़ों पर 54% टैक्स लगाया गया है। इसका मतलब है कि इन देशों के उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। दूसरी ओर, भारत को तुलनात्मक रूप से कम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में व्यापार बढ़ाने का सुनहरा मौका बनेगा।
भारतीय टेक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन के संयोजक प्रभु धामोदरन ने कहा कि पहले भारत, बांग्लादेश और वियतनाम के लिए अमेरिका में समान टैक्स नियम थे। लेकिन अब भारत को इन देशों की तुलना में एक बड़ा लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कपड़ा कंपनियां अमेरिकी बाजार में ज्यादा कंपटीटिव बन जाएंगी और उनका निर्यात बढ़ सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता हो सकती है अहम
अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता सफल रहती है और भारत को कपास (cotton) के आयात पर “शून्य शुल्क” (zero duty) मिल जाता है, तो भारतीय कपड़ा उद्योग को और भी ज्यादा फायदा हो सकता है। भारत की अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) पहले ही सरकार से यह अनुरोध कर चुकी है कि “zero for zero” नीति अपनाई जाए, यानी भारत अपने कपड़ा उत्पादों पर टैरिफ हटाए, तो अमेरिका भी भारतीय कपड़ों पर टैक्स घटा सकता है।
तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन के सलाहकार के वेंकटाचलम ने सुझाव दिया कि अगर भारत अपने कपास के आयात पर 11% टैक्स हटाकर शून्य कर देता है, तो यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा। इससे भारतीय कंपनियां सस्ते दामों पर उत्पादन कर सकेंगी और अमेरिका में प्रतिस्पर्धा में और मजबूत हो जाएंगी।
भारतीय कंपनियों के लिए सुनहरा अवसर
अमेरिका भारतीय कपड़ा निर्यात का एक बड़ा बाजार है। 2024 में अमेरिका ने कुल $107.72 अरब डॉलर का कपड़ा आयात किया था, जिसमें से चीन की हिस्सेदारी $36 अरब (30%), वियतनाम की $15.5 अरब (13%), भारत की $9.7 अरब (8%) और बांग्लादेश की $7.49 अरब (6%) थी। बांग्लादेश में 2024 में राजनीतिक अस्थिरता के कारण उसकी बाजार हिस्सेदारी घटी है, जिससे भारत के लिए अवसर और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Trident, Welspun India, Arvind, KPR Mill, Vardhman, Page Industries, Raymond और Alok Industries जैसी कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है क्योंकि उनका 20% से 60% तक का कारोबार अमेरिका से आता है।
क्या भारत अमेरिका का प्रमुख सप्लायर बन सकता है?
टीटी लिमिटेड के संजय कुमार जैन का मानना है कि शुरुआत में अमेरिकी कंपनियां अपने पुराने स्टॉक को खत्म करने में समय लेंगी। लेकिन अगर नए टैरिफ नियम लंबे समय तक लागू रहते हैं, तो अमेरिकी कंपनियों को कहीं न कहीं से कपड़े खरीदने ही होंगे। उस स्थिति में भारत सबसे सस्ता और विश्वसनीय विकल्प होगा और भारतीय कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
भारत के लिए सही समय पर सही कदम उठाने का मौका
भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, जब वह अमेरिका में अपनी कपड़ा इंडस्ट्री को और मजबूत कर सकता है। भारत की GDP में कपड़ा उद्योग का योगदान सिर्फ 2% है, जबकि बांग्लादेश में यह 11% और वियतनाम में 15% है। इसका मतलब है कि भारत को अन्य देशों की तुलना में कम दबाव झेलना पड़ेगा और वह इस मौके का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है।