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महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने कर्ज न चुका पाने के कारण एक व्यक्ति को तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, कोर्ट ने आरोपी पर 24 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे आर मुलानी ने आरोपी सूरज भागवत लोंढे को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत अपराध का दोषी ठहराया है।
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि 24 लाख रुपये की जुर्माना राशि में से 23.75 लाख रुपये शिकायतकर्ता मंदा आसाराम बहिर निवासी मीरा भयंदर को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। मामले के विवरण के मुताबिक, आरोपी ने दिसंबर, 2017 में शिकायतकर्ता से 12 लाख रुपये का उधार लिया था। दोषी को कई बार उधार चुकाने के लिए कहा गया, जिसके बाद उसने एक चेक जारी किया, जिसे पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बैंक ने बाउंस कर दिया।
अदालत को बताया किया गया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी को नोटिस भी जारी किया, लेकिन उसे पैसे नहीं मिले। न्यायाधीश ने माना कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (खाते में धन की कमी आदि के लिए चेक का अनादर) के तहत दंडनीय अपराध किया है।
आदेश में कहा गया है कि चूंकि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लेनदेन मैत्रीपूर्ण ऋण का था और शिकायतकर्ता पांच साल से अधिक समय से परेशान है, इसलिए दोषी उन्हें जुर्माना राशि 12 लाख रुपये के चेक की दोगुनी राशि देगा।