ग्वालियर। रेलवे स्टेशन पर अपने माता-पिता के साथ सो रहे मासूम बच्चे के अपहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना मंगलवार-बुधवार की रात करीब 3.30 बजे की है। इस घटना के बाद से जीआरपी सकते में आ गई है, क्योंकि एक सप्ताह के भीतर स्टेशन से बच्चे के अपहरण की यह दूसरी वारदात है।

मुरैना के हिगोना गांव निवासी रामाधार सिंह अपनी पत्नी और तीन महीने के मासूम बच्चे करन सिंह व 13 महीने के बड़े बेटे के साथ उप्र के देवरिया अपनी ससुराल गया था। यह लोग बरौनी एक्सप्रेस से देवरिया से ग्वालियर वापस आ रहे थे। रामाधार ने नईदुनिया को बताया कि झांसी में ट्रेन का इंजन फेल हो गया तो ट्रेन रात करीब 12 बजे ग्वालियर पहुंची। इन लोगों को दूसरी ट्रेन से मुरैना जाना था, लेकिन सफर में थकान हो जाने के कारण यह लोग प्लेटफॉर्म-1 पर स्थित जनरल टिकट काउंटर के पास सो गए।

माता-पिता के बीच में दोनों बच्चे सो रहे थे। रात करीब 2 बजे तेज आंधी आने लगी और बारिश होने लगी। कुछ देर बाद करीब 3 बजे स्टेशन पर बिजली गुल हो गई। बिजली गुल होते ही अंधेरा छा गया। करीब 4 बजे जब रामाधार की आंख खुली तो करन गायब था। बच्चा न मिलने पर उसने पत्नी को जगाया। इसके बाद तो माता-पिता बुरी तरह घबरा गए और रोने लगे। पूरे स्टेशन पर खलबली मच गई। अन्य यात्रियों ने दंपति को संभाला और उनके साथ मिलकर पहले तो पूरे स्टेशन पर बच्चे को तलाश किया, लेकिन जब नहीं मिला तो सभी जीआरपी थाने पहुंचे। यहां रात में ही अपहरण का मामला दर्ज कराया गया।

स्टेशन पर असुरक्षित हैं बच्चे, बच्चा चोर गिरोह सक्रिय:

रेलवे स्टेशन पर अगर आप अपने बच्चों के साथ मौजूद हैं तो बच्चों पर विशेष निगाह रखें, क्योंकि स्टेशन पर बच्चे पूरी तरह से असुरक्षित हैं। स्टेशन पर बच्चा चोर गिरोह सक्रिय है और जीआरपी इन पर लगाम कसने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि एक सप्ताह में बच्चे के अपहरण की लगातार दूसरी वारदात स्टेशन पर हुई है।

एक सप्ताह पहले जब अपहरण की पहली वारदात हुई तो जीआरपी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जीआरपी ने स्टेशन पर फालतू घूमने वालों पर कोई सख्ती नहीं बरती और न ही ऐसे लोगों की धरपकड़ की जो रात को स्टेशन पर डेरा जमाए रहते हैं। रात को कई संदिग्ध महिला, पुरुष घूमते रहते हैं, लेकिन इनसे कोई घूमने का कारण तक नहीं पूछता है। स्टेशन के आउटर में नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। इन पर जीआरपी कार्रवाई नहीं करती। जीआरपी के इसी ढीले रवैये का नतीजा है कि एक सप्ताह के भीतर ही अपहरण की लगातार दूसरी वारदात हो गई।

...इधर 6 दिन से नहीं थमे मां के आंसू:

6 मई को अपनी बेटी के साथ ट्रेन का इंतजार कर रही राधाबाई की पांच साल की बेटी का अपहरण एक महिला कर ले गई थी। इसके बाद से अभी तक बच्ची का कोई सुराग नहीं लगा है। पिछले 6 दिन से उसकी मां के आंसू नहीं थमे हैं। मां रोज यह आस लेकर जीआरपी थाने पहुंचती है कि उसकी बेटी जल्द ही मिल जाएगी, लेकिन जीआरपी ने इस मामले को बिलकुल भी गंभीरता से नहीं लिया है। उधर करन की मां ने बच्चे के अपहरण के बाद से खाना तक नहीं खाया है। वह बस अपने बेटे की याद में रोए जा रही है। पिता भी बेसुध है।

बच्ची के अपहरण का भी हुआ था प्रयास:

इन दोनों घटनाओं से पहले रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म-4 पर अपने पिता के साथ सो रही पांच साल की मासूम बच्ची के अपहरण का प्रयास भी हुआ था। इसमें बच्ची के पिता ने शोर मचा दिया था तो अपहरणकर्ता बच्ची को झाड़ियों में फेंककर भाग गए थे। इस मामले के बाद ही अगर जीआरपी सतर्कता दिखाती तो शायद लगातार अपहरण की दो घटनाएं न होतीं।

सीधी बात एसआरपी, भोपाल अवधेश गोस्वामी से

सवाल: रेलवे स्टेशन पर रात में नशेड़ी और असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। इन पर जीआरपी का कोई कंट्रोल नहीं है।

जवाब: जीआरपी का पूरा कंट्रोल है और जीआरपी ने पहले से स्थिति को काफी कंट्रोल किया है।

सवाल: अगर स्थिति पहले से कंट्रोल है तो लगातार दो अपहरण की घटनाएं होना और स्टेशन पर महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ की घटनाएं कैसे बढ़ गईं। साथ ही अपहरण करने वालों का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है।

जबाव: अपहरण की घटना को अंजाम देने वालों की तलाश लगातार जारी है, जल्द ही हम आरोपियों तक पहुंच जाएंगे। इसके अलावा भी कुछ कड़े कदम उठाए जाएंगे।