उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर उस समय गहमागहमी का माहौल देखने को मिला, जब कंप्यूटर बाबा के रूप में जाने जाने वाले नामदेव दास त्यागी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में साधु-संत धरने पर बैठ गए। संतों के इस प्रदर्शन का मुख्य कारण पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित 'सत्य सनातन यात्रा' के मार्ग पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से पुष्पवर्षा करने की प्रशासनिक अनुमति का न मिलना था। कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्रित हुए संतों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांग पर अड़े रहे। हालांकि, कुछ समय के पश्चात प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर संतों से सार्थक बातचीत की, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया और प्रशासन द्वारा तय शर्तों के अधीन पुष्पवर्षा की अनुमति प्रदान कर दी गई।
हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की अनुमति और प्रशासन की शर्तें
इस पूरे घटनाक्रम पर जानकारी साझा करते हुए उज्जैन के एसडीएम पवन बारिया ने बताया कि 'सत्य सनातन पदयात्रा' के स्वागत के सिलसिले में हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा करने को लेकर एक औपचारिक आवेदन प्राप्त हुआ था। उच्च स्तर पर विचार-विमर्श करने के उपरांत जिलाधिकारी के निर्देशानुसार यह अनुमति जारी कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बालाजी गार्डन और नरसिंह घाट के आसपास नियमों के दायरे में रहकर ही पुष्पवर्षा करने की इजाजत दी गई है, और आयोजकों को सुरक्षा व प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। अनुमति मिलने के बाद कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पुलिस प्रशासन और मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज हमेशा नियमों का सम्मान करते हुए प्रशासन का सहयोग करता आया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यात्रा के स्वागत के लिए लगभग 11 क्विंटल फूलों की व्यवस्था की गई है, जिससे दोपहर 1 से 2 बजे के बीच आसमान से पुष्पवर्षा की जाएगी।
महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी 930 किलोमीटर लंबी यात्रा
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी महत्वाकांक्षी 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' के शुभारंभ के लिए विजयादशमी का पावन दिन चुना है। यह ऐतिहासिक यात्रा उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से आरंभ होगी और लगभग 930 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार यह यात्रा उज्जैन से चलकर तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी, तालबेहट, ओरछा, चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर, लखनऊ और बाराबंकी जैसे प्रमुख पड़ावों से गुजरते हुए अपने अंतिम गंतव्य अयोध्या पहुंचेगी। इससे पूर्व भी वे नर्मदा परिक्रमा जैसी लंबी धार्मिक और सामाजिक यात्राएं कर चुके हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज बनी हुई है।





