शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि 700 श्लोकों वाले इस धार्मिक ग्रंथ के पाठ से जीवन के सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं और मन में उत्पन्न सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस लंबे अनुष्ठान और मंत्रोच्चार के दौरान अनजाने में कई बार उच्चारण या विधि में गलतियां हो जाती हैं. अगर इन गलतियों को सुधारा न जाए तो नवरात्रि व्रत की साधना अधूरी मानी जाती है. अष्टमी या नवमी पर व्रत समापन से ठीक पहले दुर्गा सप्तशती के अंतिम स्तोत्र का पाठ करना बेहद जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया जाए तो देवी की पूजा अर्चना करने का कोई फल नहीं मिलता, लेकिन दुर्गा सप्तशती के आखिरी पाठ को करने से देवी मां प्रसन्न होकर हर गलती को माफ करके व्रत का संपूर्ण फल प्रदान करती हैं.
मिलेगी दैवीय रक्षा
लोकल 18 से हरिद्वार के पंडित योगेश पंत बताते हैं कि शारदीय नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे अधिक फलदायक है. इस धार्मिक ग्रंथ की शुरुआत में दिए गए देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र और दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करने से साधक को पुण्य और दैवीय रक्षा मिलती है. पंडित योगेश बताते हैं कि दुर्गा सप्तशती के लंबे अनुष्ठान के दौरान अक्सर अनजाने में संस्कृत के कठिन मंत्रों के उच्चारण या पूजा की विधि में कोई न कोई गलती हो ही जाती है, जिसे नवरात्रि के व्रत करने का कोई फल नहीं मिलता है. इन गलतियों को सुधारने पर शारदीय नवरात्रि व्रत की कठिन साधना का भक्त को पूरा फल मिल जाता है.
पंडित योगेश पंत बताते हैं कि व्रत और दुर्गा सप्तशती के सभी मंत्र-स्तोत्रों का संपूर्ण लाभ पाने के लिए व्रत समापन के दिन क्षमा याचना स्तोत्र का पाठ सबसे अधिक जरूरी होता है. देवी भगवती ममतामयी और दयालु होती हैं. अष्टमी या नवमी पर जब भक्त सच्ची श्रद्धा और सच्चे भाव से क्षमा मांगते हैं तो देवी मां अनजाने में हुई सभी गलतियां को माफ कर देती हैं. शारदीय नवरात्रि व्रत के समापन पर इस स्तोत्र के पाठ से ही व्रत पूर्ण माना जाता है. ऐसा करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त होकर आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और मन की सभी मनोकामनाएं बिना किसी रुकावट के पूरी हो जाती हैं.





