वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े नीतिगत बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि अमेरिका रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में मध्यावधि चुनाव सिर पर हैं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण प्रशासन पर भारी दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, होर्मुज जलसंधि के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हुई है।
रूस के साथ डीजल आपूर्ति का बड़ा समझौता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के माध्यम से इस डील का ऐलान करते हुए ट्रंप ने बताया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सफल चर्चा की है। इस समझौते के तहत:
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रूस तुरंत अमेरिकी और वैश्विक बाजार में 3,00,000 टन से अधिक डीजल ईंधन की आपूर्ति करेगा।
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नवंबर के महीने में 5,00,000 टन अतिरिक्त डीजल की सप्लाई की जाएगी।
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इसके तुरंत बाद 10,00,000 टन और सप्लाई होगी।
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इसके पश्चात, रूस अपनी रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ ही समय में 30,00,000 टन और डीजल ईंधन उपलब्ध कराएगा।
चुनावों के बीच महंगाई पर काबू पाने की रणनीति
ईरान युद्ध और होर्मुज जलसंधि पर लगी पाबंदियों की वजह से वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे अमेरिका में भी महंगाई बढ़ गई है। अमेरिका में 60 से 70 प्रतिशत माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है, जिसके कारण बढ़े हुए डीजल दामों का सीधा असर ट्रक चालकों और मालिकों पर पड़ रहा है।
अक्टूबर-नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रक चालकों और किसानों का समर्थन हासिल करना ट्रंप प्रशासन के लिए बेहद अहम है। कच्चे तेल की खरीद कर उसे रिफाइन करने में अधिक समय लगने के कारण, प्रशासन ने सीधे तैयार डीजल की आपूर्ति का यह त्वरित रास्ता चुना है। ट्रंप का मानना है कि इस ऊर्जा समझौते और होर्मुज पर नियंत्रण के बाद अमेरिका और दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी गिरावट आएगी।





