नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के 'निर्वाचन सदन' की ओर आज सुबह विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं का एक बड़ा मार्च निकलने जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित विसंगतियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा है।
क्यों निकाला जा रहा है यह मार्च?
यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों में पाई गई गड़बड़ियों और चुनाव निकाय से उच्च स्तर की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग का परिणाम है। 'इंडिया' गठबंधन के बैनर तले कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता इस मार्च में हिस्सा लेकर निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। यह कदम विपक्ष के व्यापक 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान का एक अहम हिस्सा है।
विपक्षी नेताओं की प्रमुख मांगें और योजनाएं
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने जानकारी दी कि संसद भवन के मकर द्वार पर सुबह 10:30 बजे सभी विपक्षी सांसदों का एकत्र होना तय किया गया है, जिसके बाद सुबह 11 बजे निर्वाचन आयोग की तरफ शांतिपूर्ण मार्च शुरू होगा।
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जिला स्तर पर पदयात्राएं: 8 अक्टूबर तक इंडिया गठबंधन की सभी घटक पार्टियां देश भर के जिलों में पदयात्राएं और सभाएं करेंगी।
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ब्लॉक स्तरीय बैठकें: वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर 10 से 20 अक्टूबर के बीच ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी।
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'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैलियां: आगामी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य, जिला तथा ग्रामीण स्तर पर चौपाल लगाकर विशेष रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
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मतदाता सूची का सत्यापन: इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य उन 13.5 करोड़ मतदाताओं के बारे में तथ्यात्मक जानकारी जुटाना है जिनके नाम वर्तमान वोटर लिस्ट से नदारद हैं।
निर्वाचन सदन के आसपास कड़े सुरक्षा इंतजाम
विपक्ष के इस पूर्व-घोषित प्रदर्शन और मार्च के मद्देनजर चुनाव आयोग के मुख्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। गत 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद से ही राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी।





