फिल्म इंडस्ट्री में मात्र 15 साल की कम उम्र से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अपने अब तक के लंबे करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वर्ष 2005 की अपनी शुरुआती तस्वीरों से लेकर आज तक की इस पूरी विकास यात्रा को वह अपनी फिल्मों में जीवंत रूप से दर्ज होते हुए देखती हैं। इस दौरान उन्हें इस बात का थोड़ा अफसोस भी है कि व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्होंने कभी खुद के लिए पर्याप्त वक्त नहीं निकाला। एक विशेष साक्षात्कार में तमन्ना ने अपने इसी सिनेमैटिक सफर के कई अनछुए और दिलचस्प पहलू साझा किए।

'बचपन में बहुत कॉन्फिडेंट थी, फिर कन्फ्यूजन से गुजरते हुए दोबारा आत्मविश्वास हासिल किया'

वर्ष 2005 में रिलीज हुई फिल्म 'चांद सा रोशन चेहरा' से अपने अभिनय करियर का श्रीगणेश करने वाली तमन्ना उस शुरुआती दौर को याद करते हुए बताती हैं, 'मैं बचपन में बेहद आत्मविश्वासी (कॉन्फिडेंट) बच्ची हुआ करती थी। आधे समय तो मुझे खुद भी यह पता नहीं होता था कि मुझे आगे क्या करना है, लेकिन मेरे मन में यह पक्का विश्वास रहता था कि मैं इसे कर लूंगी। शायद उसी आंतरिक विश्वास ने मुझे एक सफल अभिनेता बनने में सबसे ज्यादा मदद की।'

वह आगे कहती हैं, 'लेकिन जैसे ही आप 20 वर्ष की उम्र में कदम रखते हैं, आप खुद को गहराई से समझने की कोशिश कर रहे होते हैं। आप यह टटोल रहे होते हैं कि असल में आप कौन हैं। इसी पड़ाव पर आपका शरीर कई तरह के जैविक बदलावों से गुजर रहा होता है, आपका लुक बदलने लगता है और सबसे बड़ी बात कि आप लगातार कैमरे के लेंस के सामने होते हैं। आप अपनी व्यक्तिगत असुरक्षाओं (इनसिक्योरिटीज) से भी जूझ रहे होते हैं। जिंदगी में कुछ दिन बहुत अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे भी आते हैं, और आप इन तमाम चीजों के साथ तालमेल बिठाना सीख रहे होते हैं।'

तमन्ना अपनी इस फिल्मी यात्रा को दो-दो साल के खंडों में देखती हैं। उनका कहना है, 'बचपन में मुझमें भरपूर आत्मविश्वास था, फिर एक ऐसा दौर भी आया जब मैं काफी उलझन में (कन्फ्यूज्ड) थी, और अंततः एक बार फिर से मेरा आत्मविश्वास बहुत मजबूत हो गया। मेरी इस पूरी जर्नी को फिल्मों के जरिए देखना और उसका दस्तावेजीकरण होना मेरे लिए बहुत दिलचस्प अनुभव है।'

'काश मैंने थोड़ी और छुट्टियां ली होतीं और दोस्तों की पार्टियों में गई होती'

अपने इस लंबे और व्यस्त करियर को पीछे मुड़कर देखने पर अभिनेत्री को सबसे बड़ा मलाल खुद के लिए समय न निकाल पाने का है। वह बताती हैं, 'मैं चाहूंगी कि मैंने अपनी जिंदगी के कुछ साल और थोड़ा ज्यादा वक्त अपने लिए लिया होता, ताकि चीजों को खुलकर एंजॉय कर पाती। मेरी मां इस बात को लेकर मुझसे अक्सर नाराज रहती हैं कि मैं कभी लंबे ब्रेक नहीं लेती। काश मैंने कुछ और छुट्टियां ली होतीं, दोस्तों की पार्टियों में जाती, उनके जन्मदिन सेलिब्रेट करती या परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा गुणवत्तापूर्ण समय बिताती। मुझे बस इसी एक बात का थोड़ा सा दुख रहता है।'

यदि उन्हें अब दोबारा मौका मिले तो वह नृत्य और संगीत की विधिवत शिक्षा लेना चाहती हैं। तमन्ना कहती हैं, 'मैं पिछले काफी समय से संगीत और डांस सीखना चाहती हूं, लेकिन मुझे कभी इसका पूरा मौका नहीं मिला। मैं शास्त्रीय नृत्य सीखना चाहती हूँ और संगीत की प्रॉपर ट्रेनिंग लेना चाहती हूँ। मुझे लगता है कि यह कला एक प्रकार से मेडिटेशन (ध्यान) जैसी है, जो मानसिक रूप से बहुत सुकून देने वाली और आनंददायक होती है।'

'लोग क्या सोचते हैं? इस बात की कभी परवाह नहीं करनी चाहिए'

तमन्ना का यह स्पष्ट मानना है कि अपने करियर के शुरुआती चरण में वह लोगों की राय और टिप्पणियों को लेकर काफी सोचती थीं, लेकिन अब वह अपनी जिंदगी के सभी फैसले पूरी तरह खुद लेने में विश्वास रखती हैं। वह कहती हैं, 'मुझे लगता है कि कभी भी बाहरी दुनिया या लोगों के दबाव को अपने सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए। लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, यह एक ऐसी बात है जिसकी आपको कभी परवाह नहीं करनी चाहिए। आपके कुछ फैसले सही होंगे, कुछ गलत भी साबित हो सकते हैं, लेकिन कम से कम वे आपके अपने निजी फैसले होंगे। आपको अपनी जिंदगी हमेशा अपने शर्तों पर और अपने हिसाब से जीनी चाहिए।'

'लगातार 10 दिन शूटिंग के बाद 11वें दिन मेरा बिल्कुल रिलैक्स्ड और होमलेस लुक होता है'

ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया के बीच रहने वाली तमन्ना कैमरे की शूटिंग बंद होने के बाद एकदम सामान्य और सहज अंदाज में रहना पसंद करती हैं। वह हंसते हुए बताती हैं, 'यदि मैं लगातार दस दिनों तक तैयार होकर शूटिंग कर रही हूँ, तो ग्यारवें दिन मैं अपने घर पर जाकर बिल्कुल अलग और सादगी भरे अंदाज में रहना चाहती हूँ। जब आप हर वक्त तैयार रहते हैं, तो मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को एक ब्रेक देने की बहुत जरूरत होती है। उस दिन मैं एकदम ढीली पड़ जाती हूं, एक ही जगह पर आलसी की तरह बैठ जाती हूं। सीधे शब्दों में कहूं तो मैं उस दिन पूरी तरह काउच पोटैटो बन जाती हूं, बस आराम करती हूं और उस पल को एन्जॉय करती हूं।'

वह आगे जोड़ती हैं, 'मुझे खाने-पीने का बहुत शौक है। मैं एक बड़ी फूडी हूँ। मुझे अपने दोस्तों और करीबियों को घर पर आमंत्रित करना बहुत अच्छा लगता है। हम सब साथ बैठकर बातें करते हैं और गप्पे लड़ाते हैं। मुझे अपने लोगों के बीच घर पर वक्त बिताना सबसे ज्यादा पसंद है।'

स्कूल बंक करके मां के साथ फिल्म देखना और ब्लैक में टिकट खरीदने की यादें

अपने बचपन के दिनों का एक प्यारा संस्मरण साझा करते हुए तमन्ना बताती हैं, 'स्कूल के दिनों में एक बार मैं अपनी मां के साथ फिल्म देखने गई थी। उस दिन हालात ऐसे बने कि मैंने अपना बस्ता पैक कर लिया था, स्कूल जाने के बारे में ज्यादा नहीं सोचा और मेरी मम्मी ने भी मुझसे कहा, "चलो छोड़ो, आज स्कूल नहीं जाना, क्या फिल्म देखने चलना है?" तो मैंने तुरंत कहा, "ठीक है मम्मा, बिल्कुल चलते हैं।" हम दोनों रीगल सिनेमा गए। वहाँ हॉल पर काउंटर पर टिकट खत्म हो चुकी थी, इसलिए हमने ब्लैक में टिकट खरीदी। हम उस वक्त बहुत छोटे बच्चे थे, लेकिन आज भी वो मेरी सबसे पसंदीदा याद है। सिनेमा हॉल में जाकर फिल्म देखना अपने आप में एक बेहद जादुई अनुभव हुआ करता था।'

बायोपिक और पसंदीदा अभिनेत्री श्रीदेवी को लेकर विचार

जब उनसे यह पूछा गया कि यदि कभी उनके जीवन पर कोई फिल्म (बायोपिक) बनाई जाए, तो उनका क्या सोचना है? इस पर तमन्ना ने जवाब दिया, 'मुझे लगता है कि इसके लिए मुझे अभी और भी कई बहुत दिलचस्प और बड़े काम करने होंगे, ताकि ऐसा कुछ सार्थक हो सके।'

वहीं, अगर उन्हें भविष्य में किसी अन्य अभिनेत्री की बायोपिक में अभिनय करने का मौका मिले, तो उनकी पहली पसंद दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी होंगी। वह कहती हैं, 'मैं हमेशा से श्रीदेवी मैम की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हूं और उन्हें अपना आदर्श मानती आई हूं।'

'मैं खुद को हर वक्त इंटरनेट पर गूगल करती हूं'

साक्षात्कार के अंत में जब यह सवाल पूछा गया कि क्या वह इंटरनेट पर खुद के बारे में सर्च (गूगल) करती हैं, तो उन्होंने बिना झिझक के स्वीकार किया, 'हर समय। मैं पूरे दिन खुद के बारे में गूगल करती रहती हूँ। मैं यह देखना और जानना चाहती हूँ कि लोग मेरे बारे में क्या बात कर रहे हैं। कभी-कभी सर्च करते वक्त बहुत ही मजेदार और फनी चीजें भी देखने को मिल जाती हैं।'

इंटरनेट पर अपने बारे में लिखी जाने वाली बातों का जिक्र करते हुए वह निष्कर्ष देती हैं, 'कभी-कभी ऑनलाइन इतनी बेहतरीन और शानदार स्क्रिप्ट्स या समीक्षाएं पढ़ने को मिलती हैं, जिन्हें देखकर मन में आता है कि काश हमारी फिल्मों के लिए भी कोई ऐसे ही कमाल के लेखक दो-तीन अच्छी लाइनें लिख दें। लेकिन हाँ, यह सच है कि मैं हमेशा अपना नाम गूगल पर चेक करती रहती हूँ।'