नई दिल्ली। चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर चल रही सियासी उठापटक के बीच सत्ता पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांगों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

रामदास आठवले ने खारिज की इस्तीफे की मांग

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सभी सदस्यों ने इस पूरे मुद्दे पर आपस में चर्चा की थी और नियम के मुताबिक हर किसी को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, जिसके बाद निर्णय सर्वसम्मति से घोषित किया गया था। आठवले ने दो टूक अंदाज में कहा कि कांग्रेस पार्टी चाहे कितनी भी मांगें उठा ले, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे और यह उनकी पार्टी का स्पष्ट रुख है।

विपक्ष पर साधा गया निशाना

उधर, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सार्वजनिक रूप से हर बात का विस्तार से स्पष्टीकरण दिया, जिससे विपक्ष द्वारा गढ़ा जा रहा झूठा नैरेटिव पूरी तरह बेनकाब हो गया। शिंदे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब विपक्षी दल तेलंगाना, कर्नाटक, केरल या हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव जीतते हैं, तब उन्हें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली बहुत अच्छी लगती है, लेकिन हार मिलते ही वे आयोग को भला-बुरा कहने लगते हैं।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गर्माया है सियासी माहौल

गौरतलब है कि एक अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयोग की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से जुड़े खुलासे सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल लगातार हमलावर मुद्रा में हैं। इंडिया गठबंधन और कांग्रेस पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसके विपरीत, सत्ता पक्ष के नेताओं का यह मानना है कि चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना और उन्हें निशाना बनाना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है।